नागपुर : विदर्भ के आयातकों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने की दिशा में नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स (एनवीसीसी) ने महत्वपूर्ण पहल की है। चेंबर ने क्षेत्र के कारोबारियों से अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि इससे कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया तेज होगी, माल की अनावश्यक जांच कम होगी और व्यापारिक खर्च में भी राहत मिलेगी।
एनवीसीसी के उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर ने कहा कि विदर्भ के कारोबारियों को बंदरगाहों से दूरी, परिवहन लागत और कस्टम प्रक्रिया में लगने वाले समय जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में AEO प्रमाणन मिलने पर कस्टम विभाग की ओर से प्राथमिकता के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिससे आयात-निर्यात का काम अधिक सुगम और समयबद्ध बनता है। संयुक्त सचिव मनीष जेजानी के अनुसार, AEO योजना उन व्यवसायों के लिए है जो सुरक्षा और अनुपालन के तय मानकों का पालन करते हैं। इस योजना के तहत कस्टम क्लीयरेंस में प्राथमिकता, दस्तावेजों की तेजी से जांच, कम निरीक्षण, डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी जैसी कई सुविधाएं मिल सकती हैं, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाएं पहले से अधिक आसान हो जाती हैं।
एनवीसीसी की अप्रत्यक्ष कर समिति के संयोजक सीए रितेश मेहता ने कहा कि AEO को केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि व्यापार को गति देने वाले प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होने के साथ-साथ माल की समय पर डिलीवरी संभव होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विदर्भ के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी। चेंबर ने निर्माताओं, मर्चेंट एक्सपोर्टर्स, नियमित आयातकों और अन्य पात्र कारोबारियों से AEO प्रमाणन के लिए अपनी पात्रता का आकलन कर इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है। इस दौरान एनवीसीसी की ओर से सीमा शुल्क विभाग के अतिरिक्त आयुक्त पंकज कुमार, नितिन अग्रवाल, आईसीडी मिहान के सहायक आयुक्त संजय नंदेश्वर तथा डॉ. पूनम धरमसे का सम्मान भी किया गया। चेंबर ने व्यापार जगत और सीमा शुल्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी व्यापारिक जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।


