नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कानून के छात्रों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Bar Council of India (BCI) और State Bar Councils के पास लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
यह फैसला NALSAR University of Law, Hyderabad से जुड़े मामले में आया। BCI चेयरमैन ने 13 अगस्त को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने और छात्रों व फैकल्टी के खिलाफ जांच की बात कही थी। हालांकि, विरोध के बाद BCI ने इन निर्देशों को करीब एक घंटे में वापस ले लिया था। मामले में NALSAR के दो पूर्व छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले ही छात्रों और फैकल्टी को BCI या State Bar Council की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी।
छात्रों पर अधिकार विश्वविद्यालय का
CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि Advocates Act, 1961 के तहत BCI को कानून के छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार नहीं दिया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उनके संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान के पास है। छात्र के अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही BCI उसके पेशेवर आचरण को नियंत्रित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त और उसके बाद जारी संबंधित संचार को कानूनी अधिकार के बिना जारी किया गया घोषित करते हुए अपने अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया।


