मुंबई : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में आम नागरिकों, किसानों और न्याय व्यवस्था से जुड़े सात अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। कृषि, ऊर्जा, प्रशासन और विधि-न्याय विभागों से जुड़े इन निर्णयों का सीधा लाभ राज्य के विभिन्न वर्गों को मिलने की उम्मीद है।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला ‘गोपीनाथ मुंडे शेतकरी अपघात सुरक्षा सानुग्रह अनुदान योजना’ को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का रहा। सरकार ने इस योजना के दायरे का विस्तार करते हुए अब भूमिहीन खेत मजदूरों और महिला किसानों को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे पहले जो परिवार इस योजना से वंचित थे, उन्हें भी अब आर्थिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। ऊर्जा विभाग से जुड़े एक अन्य फैसले के तहत मुंबई के सभी सरकारी कार्यालयों और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के बिजली बिल अब बेस्ट की संयुक्त बिलिंग प्रणाली के माध्यम से केंद्रीकृत तरीके से जमा किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे बिल भुगतान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान होगी। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में तीन नए राज्य सूचना आयुक्तों के पदों को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही इन पदों के संचालन के लिए आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों के पद भी सृजित किए जाएंगे।
विधि एवं न्याय विभाग के तहत राज्य में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से पांच नए न्यायालयों की स्थापना को भी मंजूरी मिली है। छत्रपति संभाजीनगर जिले के सिल्लोड और नांदेड़ जिले के किनवट में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय शुरू किए जाएंगे। वहीं, नासिक के चांदवड और बीड के केज में वरिष्ठ स्तर के दीवानी न्यायालय स्थापित होंगे। इसके अलावा पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ में विशेष मोटर वाहन न्यायालय की स्थापना को भी हरी झंडी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और आम लोगों को तेज व सुलभ न्याय व्यवस्था का लाभ मिलेगा।


