भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए आज का दिन बेहद खास रहा। निजी कंपनी स्कायरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित ‘Vikram-1’ रॉकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक उड़ान भरकर देश के निजी स्पेस सेक्टर को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के बदलते अंतरिक्ष भविष्य की मजबूत दस्तक मानी जा रही है। सरकार द्वारा 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद कई स्टार्टअप्स ने इस दिशा में काम शुरू किया था। अब ‘Vikram-1’ की सफलता ने यह दिखा दिया है कि भारतीय निजी कंपनियां भी उपग्रह प्रक्षेपण और व्यावसायिक स्पेस मिशन जैसे बड़े काम करने की क्षमता रखती हैं।
क्या है Vikram-1 की खासियत?
‘Vikram-1’ एक चार चरणों वाला ऑर्बिटल रॉकेट है। इसके शुरुआती तीन चरणों में सॉलिड फ्यूल का उपयोग किया गया है, जबकि अंतिम चरण में लिक्विड फ्यूल इंजन लगाया गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर दोबारा चालू भी किया जा सकता है। यही तकनीक उपग्रहों को उनकी सटीक कक्षा में स्थापित करने में मदद करती है। यह रॉकेट खास तौर पर छोटे उपग्रहों को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। आने वाले समय में इसे नियमित व्यावसायिक लॉन्च के लिए इस्तेमाल करने की योजना है।
सब-ऑर्बिटल से ऑर्बिटल तक का सफर
स्कायरूट ने इससे पहले 2022 में ‘Vikram-S’ नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। लेकिन वह मिशन केवल अंतरिक्ष सीमा तक पहुंचने तक सीमित था। इस बार ‘Vikram-1’ का लक्ष्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करना है, जो तकनीकी रूप से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
यदि मिशन पूरी तरह सफल रहता है, तो स्कायरूट एयरोस्पेस उन चुनिंदा भारतीय निजी कंपनियों में शामिल हो जाएगी जो उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने में सक्षम हैं। इससे भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल सकती है और देश से अधिक कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च का रास्ता खुल सकता है। यह सफलता सिर्फ एक कंपनी की नहीं, बल्कि उस नए भारत की कहानी है जो अब अंतरिक्ष क्षेत्र में भी निजी नवाचार और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहा है।


