प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले देशवासियों को संबोधित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद का सुचारु रूप से चलना लोकतंत्र और देशहित दोनों के लिए आवश्यक है। सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है और उम्मीद है कि सभी दल जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री ने मानसून और मानसून सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे बारिश समय पर और सक्रिय हो तो लोगों का भला होता है, वैसे ही संसद का सत्र भी उत्पादक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मानसून और संसद, दोनों ही “प्रो-एक्टिव” और “प्रोडक्टिव” रहें, तो इसका सीधा लाभ देश और आम जनता को मिलेगा।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पिछले एक महीने में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं। खासतौर पर भारतीय युवाओं द्वारा स्थापित स्टार्टअप्स ने अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर दुनिया का ध्यान भारत की ओर आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भारत के युवाओं की क्षमता और उनके सपने असीम हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपने आत्मविश्वास और नवाचार से दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया है।
पीएम मोदी ने संसद के वरिष्ठ सांसदों के अनुभव का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके ज्ञान और मार्गदर्शन की देश को आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संसद में स्वस्थ बहस, तर्कपूर्ण चर्चा और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। देश का युवा चाहता है कि भारत तेजी से आगे बढ़े और संसद इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभाए। उन्होंने अंत में कहा कि जहाँ तर्क और संवाद होता है, वहाँ टकराव की कोई जगह नहीं होती। लोकतंत्र की मजबूती के लिए संसद का सुचारु और सार्थक संचालन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


