वडोदरा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में 6 हजार से ज्यादा Gen-Z युवाओं से सीधा संवाद किया। ‘नमो फॉर अ डेवलप्ड इंडिया’ कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं से बातचीत करते हुए भारत के भविष्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), शिक्षा, कौशल और विकसित भारत के लक्ष्य पर अपने विचार रखे।
वडोदरा में करीब 35 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
AI में आगे बढ़ने के लिए युवाओं को बनना होगा कुशल
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत में कंप्यूटर चिप से लेकर बड़े-बड़े जहाज तक बनाने की क्षमता विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं को AI के क्षेत्र में दक्ष होना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ जरूरी कौशल विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर भारत को AI के क्षेत्र में महाशक्ति बनना है तो देश की पूरी AI इकोसिस्टम में बदलाव लाना होगा। मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह लक्ष्य देश के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
फेक नैरेटिव के बीच युवाओं की भूमिका अहम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जगह-जगह फेक नैरेटिव फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन देश की युवा पीढ़ी सच्चाई के साथ खड़ी है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों का भी उल्लेख किया और कहा कि नई पीढ़ी को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
2800 किमी से ज्यादा लंबा फ्रेट कॉरिडोर पूरा
वडोदरा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में 2800 किलोमीटर से ज्यादा लंबा समर्पित मालवाहक कॉरिडोर अब पूरा हो चुका है। उनके मुताबिक, 21वीं सदी के भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए तेज और बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी है। वडोदरा को उन्होंने गति शक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जगह बताते हुए कहा कि आज फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम हिस्से भी जुड़ गए हैं।
‘पहले फाइलें टेबल पर घूमती रहती थीं’
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछली सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की कल्पना 2004 में शुरू हुई थी और 2006 में इसके लिए एक विशेष कंपनी बनाई गई थी। इसके बावजूद 2014 तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहीं। मोदी ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि फाइलें टेबलों पर सफर करती रहीं और दुर्भाग्य से उन्हें भी कोई ‘डेडिकेटेड कॉरिडोर’ नहीं मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की कार्यसंस्कृति में आया बदलाव इस परियोजना से साफ दिखाई देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि विकसित भारत के निर्माण में वे अपनी क्षमता, कौशल और नई सोच के साथ सक्रिय भूमिका निभाएं।


