ब्रोशर में जो दिखाया, जमीन पर भी वही बनाओ! सुप्रीम कोर्ट का बिल्डरों को सख्त संदेश

घर खरीदारों के भरोसे से खिलवाड़ नहीं चलेगा, गुरुग्राम के प्रोजेक्ट पर सुनवाई के दौरान SC की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली : घर खरीदते समय ग्राहक सिर्फ चार दीवारों वाला फ्लैट नहीं खरीदता, बल्कि उसे ब्रोशर में दिखाई गई पूरी तस्वीर पर भरोसा होता है। सोसायटी में कैसी सड़क होगी, पार्किंग कैसी होगी, गार्डन और दूसरी सुविधाएं कैसी होंगी—इन सभी चीजों को देखकर लोग अपनी जिंदगी की बड़ी कमाई घर में लगाते हैं। ऐसे में ब्रोशर में कुछ और दिखाकर जमीन पर कुछ और बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों को इसी बात का स्पष्ट संदेश दिया है।

यह मामला गुरुग्राम के द प्राइमस, डीएलएफ गार्डन सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है। यह प्रोजेक्ट 2012 में शुरू हुआ था। इसके ब्रोशर में दो 24 मीटर चौड़ी सड़कों के साथ कई सुविधाएं दिखाई गई थीं। इन्हीं दावों और वादों के आधार पर ग्राहकों ने फ्लैट खरीदे थे।

तय समय पर नहीं मिला घर, सुविधाएं भी अधूरी

ग्राहकों को 28 फरवरी 2016 तक फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया गया था। लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हुई और जनवरी 2017 से कब्जा देना शुरू किया गया। समस्या यह थी कि कब्जा मिलने के बावजूद कई बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं हुई थीं। जिस घर को लेकर लोगों ने सालों की मेहनत की कमाई लगाई थी, वहां पहुंचने के बाद जब ब्रोशर और हकीकत में अंतर नजर आया, तो खरीदारों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

ब्रोशर की सड़क और असली सड़क में अंतर

ग्राहकों ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट में बनी सड़कों की स्थिति ब्रोशर में दिखाई गई तस्वीर से अलग है। 29 मई 2023 को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ग्राहकों की शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने कहा कि ब्रोशर में निजी सड़कों को सेक्टर रोड के तौर पर दिखाना अनुचित व्यापार व्यवहार है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने CBI से कराई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इसे सिर्फ एक प्रोजेक्ट का विवाद नहीं माना। कोर्ट ने CBI को मामले की जांच के निर्देश दिए। CBI की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया कि ब्रोशर में दिखाई गई 24 मीटर चौड़ी सड़क वास्तव में मौजूद नहीं है। रिपोर्ट में पार्किंग और कुछ हिस्सों में गार्डन बनाए जाने की भी जानकारी दी गई है।

‘अगर ब्रोशर में दिखाया है तो बनाना भी होगा’

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि अगर रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह की गतिविधियां संगठित तरीके से हो रही हैं, तो आम घर खरीदारों का क्या होगा? कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि ग्राहक को आकर्षक ब्रोशर दिखाकर फ्लैट बेच देना और बाद में वादे के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध न कराना स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट को ब्रोशर में दिखाए गए तरीके के अनुसार पूरा करने को कहा है। ऐसा नहीं होने पर आगे कार्रवाई के आदेश दिए जा सकते हैं।

घर खरीदारों के लिए बड़ा संदेश

इस पूरे मामले ने उन लाखों लोगों की चिंता को सामने ला दिया है, जो घर खरीदते समय बिल्डर के ब्रोशर और विज्ञापनों पर भरोसा करते हैं। घर खरीदना किसी भी परिवार के लिए जिंदगी का बड़ा फैसला होता है। ऐसे में विज्ञापन में दिखाए गए सपनों और हकीकत के बीच अंतर नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी घर खरीदारों के लिए एक अहम संदेश है—ब्रोशर सिर्फ विज्ञापन नहीं, बल्कि ग्राहक के भरोसे का हिस्सा है। जो सुविधा दिखाकर घर बेचा गया है, उसे जमीन पर भी पूरा करना होगा।

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