नई दिल्ली : भारत के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) बन सकती हैं। अगर मौजूदा वरिष्ठता क्रम बना रहता है, तो सितंबर 2027 में उनके नाम पर CJI पद के लिए विचार हो सकता है। हालांकि, उनका संभावित कार्यकाल बेहद छोटा, करीब 36 दिनों का होगा।
भारत में 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद से अब तक किसी महिला न्यायाधीश ने देश के मुख्य न्यायाधीश का पद नहीं संभाला है। ऐसे में जस्टिस नागरत्ना का संभावित CJI बनना भारतीय न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा।
वरिष्ठता क्रम में आगे बढ़ रहा नाम
सुप्रीम कोर्ट में CJI की नियुक्ति की परंपरा आमतौर पर वरिष्ठता के आधार पर आगे बढ़ती है। मौजूदा उत्तराधिकार क्रम के अनुसार जस्टिस सूर्यकांत और उनके बाद जस्टिस विक्रम नाथ के बाद जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का नाम आता है। इसी वजह से 2027 में उनके CJI बनने की संभावना जताई जा रही है। जस्टिस नागरत्ना के CJI बनने की स्थिति में उन्हें करीब 36 दिनों का कार्यकाल मिल सकता है। उनकी सेवानिवृत्ति 29 अक्टूबर 2027 को होने की उम्मीद है।
पिता भी रह चुके हैं देश के CJI
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के नाम से जुड़ी एक और खास बात है। उनके पिता जस्टिस ई.एस. वेंकटरमैया भी भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने जून 1989 से दिसंबर 1989 तक CJI के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अगर जस्टिस नागरत्ना CJI बनती हैं, तो वह ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने वाली पहली महिला होंगी, जिनके पिता और उन्होंने खुद भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला हो।
कानून की पढ़ाई से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का जन्म 30 अक्टूबर 1962 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज से इतिहास में बीए ऑनर्स किया और 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1987 में वकालत शुरू की और संवैधानिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक और पारिवारिक कानून जैसे कई क्षेत्रों में काम किया। बाद में न्यायपालिका में अपनी अलग पहचान बनाई और सुप्रीम कोर्ट की पीठ का हिस्सा बनीं।
कई अहम मामलों में दिया फैसला
जस्टिस नागरत्ना कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रही हैं। नोटबंदी मामले में उन्होंने बहुमत के फैसले से अलग राय रखी थी। इसके अलावा खनिज रॉयल्टी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में भी उन्होंने न्यायिक भूमिका निभाई है।
2009 की घटना में दिखाई थी मजबूती
जस्टिस नागरत्ना के न्यायिक सफर में 2009 की एक घटना भी खास तौर पर याद की जाती है। कर्नाटक हाई कोर्ट परिसर में प्रदर्शन कर रहे वकीलों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया था। तनावपूर्ण माहौल के बावजूद उन्होंने अपनी गरिमा और न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया। उनका स्पष्ट रुख था कि न्यायपालिका को धमकियों के सामने झुकना नहीं चाहिए और कानून के प्रति ली गई शपथ का पालन करना ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पहली महिला CJI का इंतजार
भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक अभी तक कोई महिला नहीं पहुंची है। ऐसे में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना का संभावित CJI बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का बड़ा प्रतीक माना जाएगा। अगर सब कुछ मौजूदा वरिष्ठता परंपरा के अनुसार चलता है, तो 2027 में भारत को अपनी पहली महिला CJI मिल सकती है। हालांकि, अंतिम नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया और उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।


