कोलंबो : भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई दो मैचों की टेस्ट सीरीज भारत ने 1-0 से अपने नाम कर ली। सीरीज का दूसरा मुकाबला कोलंबो में ड्रॉ रहा, लेकिन इस पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने अपने प्रदर्शन से खूब सुर्खियां बटोरीं। दो टेस्ट मैचों में दो शतक लगाने वाले पडिक्कल को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। लेकिन सीरीज जीतने के बाद पडिक्कल की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने फैंस का ध्यान उनके खेल से ज्यादा उनकी पीठ पर बने अनोखे ‘टैटू’ की ओर खींच लिया।
सूरज ने बना दिया जर्सी नंबर का टैटू!
पडिक्कल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस सीरीज से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला और वह आगे की चुनौतियों के लिए तैयार हैं। इसी पोस्ट के साथ उन्होंने अपनी पीठ की एक तस्वीर भी शेयर की। तस्वीर में उनकी पीठ पर धूप से टैनिंग के कारण जर्सी नंबर और नाम की स्पष्ट छाप दिखाई दे रही है। दरअसल, कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम को लंबे समय तक मैदान पर फील्डिंग करनी पड़ी थी। करीब 250 ओवर तक फील्डिंग करने के बाद तेज धूप का असर पडिक्कल की पीठ पर साफ नजर आया। यही वजह है कि उन्होंने इसे मजाकिया अंदाज में ‘सूर्य ने मुझे टैटू दिया’ बताया। उनकी यह तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस के बीच चर्चा शुरू हो गई।
दो टेस्ट, दो शतक और 328 रन
पडिक्कल के लिए यह सीरीज बेहद खास रही। उन्होंने दोनों टेस्ट मैचों में शतक लगाए और पूरी सीरीज में 328 रन बनाए। उनका बल्लेबाजी औसत करीब 109 रहा। कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में पडिक्कल ने 117 रन की शानदार पारी खेली। उनके साथ ध्रुव जुरेल ने भी नाबाद 115 रन बनाए। भारत ने 9 विकेट पर 503 रन बनाकर पारी घोषित की। इसके बाद श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर सिमट गई और भारत को 213 रन की बढ़त मिली। हालांकि दूसरी पारी में श्रीलंका ने शानदार वापसी की। सोनल दिनूशा ने नाबाद 133 रन बनाए और श्रीलंका ने 9 विकेट पर 429 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। भारत के सामने 216 रन का लक्ष्य था, लेकिन मैच खत्म होने के लिए 15 से भी कम ओवर बचे थे। ऐसे में दोनों टीमों की सहमति से मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया।
दो साल बाद टेस्ट टीम में वापसी
देवदत्त पडिक्कल ने करीब दो साल बाद भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की थी। साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी का मौका मिला। पडिक्कल ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी। सीरीज के बाद उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी की इच्छा होती है कि वह देश के लिए खेले और लगातार मेहनत करता रहे। हालांकि प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना खिलाड़ी के हाथ में नहीं होता। जब भी अवसर मिले, उस मौके के लिए तैयार रहना और टीम के साथियों की मदद करना जरूरी है।
पडिक्कल का प्रदर्शन यही बताता है कि मौका चाहे जितनी देर से मिले, अगर तैयारी पूरी हो तो उसे यादगार बनाया जा सकता है। और इस बार उनकी मेहनत की याद सिर्फ रिकॉर्ड में नहीं, बल्कि उनकी पीठ पर बनी उस मजेदार ‘टैटू’ की छाप में भी दिखाई दे रही है।


