पेंशन मिल रही है तो बच्चों को घर से नहीं निकाल सकते! हाईकोर्ट का अहम फैसला

खुद का खर्च उठाने में सक्षम माता-पिता को कानून के तहत बेदखली का अधिकार नहीं

नागपुर : क्या सिर्फ पारिवारिक विवाद होने पर माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर निकाल सकते हैं? इस सवाल पर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर माता-पिता नियमित पेंशन या अन्य आय के जरिए अपना भरण-पोषण करने में सक्षम हैं, तो वे माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम का इस्तेमाल सिर्फ बच्चे को घर से बेदखल करने के लिए नहीं कर सकते।

यह मामला नागपुर के पास दत्तवाड़ी क्षेत्र के एक 65 वर्षीय पिता और उनके बेटे-बहू के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। पिता ने विवाद के बाद बेटे को घर से बेदखल करने की मांग करते हुए संबंधित उपविभागीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद जिलाधिकारी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत

निचली दोनों संस्थाओं के फैसले के बाद पिता ने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे के समक्ष हुई। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक कानून की धारा 4 और 5 का उद्देश्य उन माता-पिता या वरिष्ठ नागरिकों को संरक्षण और भरण-पोषण देना है, जो अपनी आय या संपत्ति से अपना जीवनयापन करने में सक्षम नहीं हैं। इस मामले में पिता को नियमित सेवानिवृत्ति वेतन के साथ अपनी दिवंगत पत्नी की पारिवारिक पेंशन भी मिल रही है। ऐसे में वह आर्थिक रूप से अपना खर्च उठाने में सक्षम हैं। इसलिए उन्हें इस कानून के तहत बेटे को घर से निकालने का लाभ नहीं दिया जा सकता।

बेटे ने रखी समझौते की पेशकश

मामले को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने पिता और बेटे के बीच मध्यस्थता कराने की भी कोशिश की। बेटे ने पिता के सामने घर के ग्राउंड फ्लोर पर रहने और खुद पहली मंजिल पर रहने की पेशकश की थी। हालांकि, पिता ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखते हुए पिता की याचिका खारिज कर दी।

कानून का मकसद सिर्फ बेदखली नहीं

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत किसी बच्चे को घर से बाहर करने का आदेश मुख्य रूप से माता-पिता के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए होता है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपनी नियमित आय से अपना जीवनयापन करने में सक्षम है, तो केवल पारिवारिक विवाद के आधार पर इस कानून का इस्तेमाल बच्चे को घर से निकालने के लिए नहीं किया जा सकता।

यह फैसला उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पारिवारिक विवादों में वरिष्ठ नागरिक कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल संपत्ति या घर से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए किया जाता है।

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