पुणे पुलिस की दबंगई पड़ी भारी! आरोपियों की सरेआम पिटाई के मामले में 13 पुलिसकर्मियों पर FIR

सड़क पर घुटनों के बल चलवाने और लाठी से मारपीट का आरोप, मानवाधिकार आयोग की जांच के बाद CID की कार्रवाई

पुणे : पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लोगों की सुरक्षा करना है, लेकिन पुणे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर ही आरोपियों के साथ मारपीट और उन्हें सरेआम अपमानित करने का आरोप लगा है। आरोपियों को सड़क पर घुटनों के बल चलाने, लाठी-काठियों से मारपीट करने और लोगों के सामने हाथ जोड़कर माफी मंगवाने के आरोपों के बाद भारती विद्यापीठ पुलिस थाने के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक समेत 13 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में CID के पुलिस उपअधीक्षक संकेत सतीश गोसावी ने खुद शिकायतकर्ता बनकर भारती विद्यापीठ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेश और रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई है।

आखिर क्या हुआ था?

भारती विद्यापीठ पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 363/2026 के मामले में दिनेश उर्फ दीपक विकास नेटके और उसके तीन साथी सरफराज शेख, गणेश थोरात और दुर्वेश पवार 5 जुलाई 2026 को दोपहर में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने पहुंचे थे। आरोप है कि उसी रात देर से उनकी औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई गई। आरोप के मुताबिक, आत्मसमर्पण के बाद तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील और अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपियों के हाथ-पैर पर पट्टे से मारपीट की।

इसके बाद अदालत से पुलिस हिरासत मिलने के बाद 7 जुलाई की शाम चारों आरोपियों को लेक टाउन के पास स्थित SRA कॉलोनी के पार्किंग क्षेत्र में ले जाया गया। आरोप है कि यहां उन्हें सड़क पर घुटनों के बल चलाया गया और हाथ-पैर पर लाठी-काठियों से मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उन्हें वहां मौजूद लोगों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगने के लिए भी मजबूर किया गया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। मामले में यह भी सामने आया कि आरोपियों को उस स्थान पर ले जाने की जानकारी पुलिस थाने की जनरल डायरी या वाहन के लॉगबुक में दर्ज नहीं थी।

मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। आयोग की सत्यशोधन समिति की जांच में पुलिस की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया गया। जांच के दौरान आरोपियों के शरीर पर चोट के निशान होने की बात भी सामने आई। आरोप है कि इन चोटों का उल्लेख डॉक्टरों के मेडिकल प्रमाणपत्र में नहीं किया गया था। इसके बाद आयोग के निर्देश पर पुलिस महासंचालक ने मामला CID को सौंप दिया।

इन 13 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज

मामले में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील सहित आण्णा मधुकर दराडे, निलेश राजेंद्र मोकाशी, फकीर, सुनील दादा हनवते, सागर चंद्रकांत बोरगे, सोहम कैलास शेंडकर, राहुल अशोक औधकर, मितेश दत्तात्रय चोरमोले, रविंद्र शंकर गायकवाड, संदीप लक्ष्मण, सुतार और पवार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 127(2), 127(3), 131, 352, 351(2), 198 और 199 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जांच अतिरिक्त पुलिस महासंचालक सुनील रामानंद के मार्गदर्शन में CID द्वारा की जा रही है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपियों के साथ हुई कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान की पूरी घटना में किसकी क्या भूमिका थी।

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