नागपुर : पेट्रोल-डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के इन्क्युबेशन सेंटर ने एक नई पहल की है। यहां उद्योगों के भीतर माल ढुलाई के लिए बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इस ट्रक की बैटरी की स्थिति मोबाइल पर भी देखी जा सकेगी।
महात्मा ज्योतिबा फुले शैक्षणिक परिसर स्थित इन्क्युबेशन सेंटर में शुक्रवार को कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के हाथों फीता काटकर इस इलेक्ट्रिक ट्रक स्टार्टअप की शुरुआत की गई।
दो साल की मेहनत से तैयार हुआ ट्रक
उद्योगों में एक जगह से दूसरी जगह सामान पहुंचाने के लिए अभी भी कई जगह पेट्रोल-डीजल वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ईंधन खर्च के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। इसी समस्या को देखते हुए छात्र रुद्राक्ष चौबे ने उद्योगों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रक बनाने का फैसला किया। रुद्राक्ष ने वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय के इन्क्युबेशन सेंटर में शुभलक्ष्मी मेकाट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी शुरू की। करीब दो साल की मेहनत के बाद उन्होंने 4 हजार किलो तक माल ढोने की क्षमता वाला इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार किया।
8 से 10 साल चलेगी बैटरी
इस ट्रक में लिथियम फेरो फॉस्फेट बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। इसकी क्षमता 15 किलोवाट है और बैटरी की लाइफ करीब 8 से 10 साल बताई गई है। फास्ट चार्जिंग सुविधा के कारण बैटरी को करीब 2 से ढाई घंटे में पूरी तरह चार्ज किया जा सकता है। ट्रक पूरी तरह इलेक्ट्रिक होने के कारण इससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा। इसके इस्तेमाल से उद्योगों में माल ढुलाई के दौरान होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ ईंधन और वाहन रखरखाव का खर्च भी कम होने की उम्मीद है।
मोबाइल पर मिलेगी बैटरी की जानकारी
इस इलेक्ट्रिक ट्रक की सबसे खास सुविधाओं में से एक इसकी स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम है। इसके जरिए ट्रक की बैटरी की स्थिति मोबाइल फोन पर भी देखी जा सकती है। इसके अलावा ट्रक में आगे-पीछे चलने के लिए गियर सिस्टम, इमरजेंसी स्टॉप, पार्किंग ब्रेक, बैटरी एसओसी, इंडिकेटर, हॉर्न और सॉलिड टायर जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
पहला मॉडल भुसावल भेजा गया
रुद्राक्ष चौबे द्वारा तैयार किए गए इलेक्ट्रिक ट्रक का पहला मॉडल भुसावल रेलवे लोकोशेड भेजा गया है। यहां लोकोशेड के भीतर सामान और सामग्री की ढुलाई के लिए इस इलेक्ट्रिक ट्रक का इस्तेमाल किया जाएगा।
छात्र की सोच से स्टार्टअप तक
इस पहल की खास बात यह है कि विश्वविद्यालय के इन्क्युबेशन सेंटर में एक छात्र की कल्पना को वास्तविक उत्पाद में बदला गया है। पर्यावरण संरक्षण के साथ उद्योगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह इलेक्ट्रिक ट्रक भविष्य में आंतरिक माल ढुलाई के लिए एक उपयोगी विकल्प बन सकता है। कार्यक्रम में प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ, आईक्यूएसी संचालक डॉ. नंदकिशोर करडे, इन्क्युबेशन सेंटर संचालक डॉ. अभय देशमुख और शुभलक्ष्मी मेकाट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रुद्राक्ष चौबे सहित अन्य उपस्थित रहे।


