छत्रपति संभाजीनगर : राज्यभर में खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत चल रही कार्रवाई के बीच दूध डेयरियों को बड़ी राहत मिली है। मुंबई हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने अन्न एवं औषध प्रशासन (FDA) द्वारा कई दूध डेयरियों के लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से डेयरी संचालकों के साथ-साथ हजारों दूध उत्पादक किसानों को भी बड़ी राहत मिली है।
FDA ने हाल ही में छत्रपति संभाजीनगर समेत कई जिलों में डेयरियों का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान स्वच्छता और अन्य नियमों में कमियां मिलने का हवाला देते हुए कई डेयरियों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ शिवकृपा डेयरी (छत्रपति संभाजीनगर), कृष्णानंद फूड प्रोडक्ट, जतिन दूध संकलन, जयहरी दूध संकलन, सिद्धेश्वर मिल्क प्रोडक्ट, सरस्वती मिल्क प्रोडक्ट और नवनाथ दूध संकलन सहित कई डेयरियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कानून और FDA आयुक्त के दिशा-निर्देशों के अनुसार निरीक्षण में कमियां मिलने पर उन्हें सुधार के लिए 14 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। बिना यह अवसर दिए सीधे लाइसेंस निलंबित करना नियमों के विरुद्ध है।
याचिका में यह भी बताया गया कि संबंधित डेयरियां प्रतिदिन 20 से 25 हजार लीटर दूध का संकलन करती हैं और प्रत्येक डेयरी से दो से तीन हजार किसान जुड़े हुए हैं। ऐसे में लाइसेंस निलंबन का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है। डेयरियों ने यह भी दावा किया कि निरीक्षण में बताई गई कई कमियों को उन्होंने पहले ही दूर कर दिया है। प्राथमिक सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संतोष चपलगांवकर की पीठ ने लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राहुल करपे और अधिवक्ता शशिकांत माने ने पैरवी की।


