नागपुर : नागपुर के प्रसिद्ध टेकड़ी गणपति मंदिर के गर्भगृह का लोकार्पण मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के हाथों किया गया। इस अवसर पर डॉ. भागवत ने टेकड़ी गणपति के साथ अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि नागपुरकरों को टेकड़ी गणपति के बारे में कुछ बताने की जरूरत नहीं है। वर्ष 1964 से वे भी नियमित रूप से यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि समय के साथ टेकड़ी गणपति मंदिर में भी धीरे-धीरे बदलाव हुआ है। मंदिर टप्पे-टप्पे से बड़ा होता गया और आज गर्भगृह के लोकार्पण का अवसर मिलना भी इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि गणपति को संघटित शक्ति का देवता माना जाता है। गणपति गणनायक हैं और संगठन की शक्ति उनके साथ जुड़ी हुई है। इसी कारण उन्हें विघ्नों का नाश करने वाला, सुखकर्ता और दुखहर्ता माना जाता है।
समाज को जोड़ने वाली भावना जरूरी
डॉ. भागवत ने कहा कि दुनिया में संगठन समान आधार और समान उद्देश्यों के लिए बनते हैं। समाज में भी जब आपलेपन की भावना मजबूत होती है, तो कई समस्याओं का समाधान अपने आप होने लगता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन खिलाड़ियों से हमारा व्यक्तिगत परिचय तक नहीं होता, उनके जीतने पर भी हमें खुशी होती है। इसका कारण उनके साथ हमारा एक संबंध होता है और वह संबंध अपनेपन तथा देश का होता है। यही भावना यदि हम अपने हर काम में लेकर आएं, तो समाज की कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
मंदिर में गर्भगृह का विशेष महत्व
गर्भगृह के महत्व पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि मंदिर में गर्भगृह बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि वहीं देवता विराजमान होते हैं। व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से कहीं भी उपासना कर सकता है, लेकिन जब पूरा समाज एक साथ प्रार्थना और उपासना करता है, तब मंदिर जैसे केंद्र की आवश्यकता होती है। उन्होंने गणपति के स्वरूप और चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि गणपति सगुण और चेतना के साथ विद्यमान हैं। यह चेतना बोध स्वरूप है और मनुष्य के भीतर मौजूद इसी जाणीव यानी जागरूकता का लाभ व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज को भी मिलता है।
टेकड़ी गणपति मंदिर से अपने पुराने संबंध को याद करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि वर्षों से यहां आते हुए मंदिर को बदलते और विस्तार लेते देखना उनके लिए भी एक विशेष अनुभव रहा है। गर्भगृह के लोकार्पण के साथ मंदिर की धार्मिक और सामाजिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।


