नई दिल्ली : भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन ने अब नई गति पकड़ ली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 2027 की पहली तिमाही में देश के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को लॉन्च करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। मिशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, जिससे भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।
इसरो ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए आवश्यक प्रोपल्शन सिस्टम तैयार कर लिए हैं। इसके अलावा TV-D1 टेस्ट व्हीकल मिशन के जरिए क्रू एस्केप सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। पैराशूट रिकवरी सिस्टम, पर्यावरणीय परीक्षण और इंटीग्रेटेड सॉफ्टवेयर सिमुलेशन भी सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायुसेना के चार पायलट रूस में अपना शुरुआती प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। अब उन्हें मिशन से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अंतरिक्ष यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
हालांकि, मानवयुक्त मिशन से पहले इसरो कुछ और क्रूलेस (बिना अंतरिक्ष यात्री वाले) डेमो मिशन लॉन्च करेगा। इन परीक्षणों की सफलता के बाद 2027 की पहली तिमाही में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन भेजने का लक्ष्य रखा गया है। गगनयान मिशन की सफलता भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। इसके बाद भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। साथ ही इस मिशन से रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और नई अंतरिक्ष तकनीकों के विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह मिशन केवल अंतरिक्ष तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के उस सपने की मजबूत नींव भी है, जिसके तहत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना बनाई गई है। गगनयान मिशन देश के युवाओं के लिए भी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा बन रहा है।
