ISRO की बड़ी छलांग! 36 हजार किमी ऊपर से दुश्मन की हर हलचल पर नजर रखेगा ‘नॉटी बॉय’

EOS-05 की सफल लॉन्चिंग से भारत की अंतरिक्ष और सुरक्षा क्षमता को मिला नया बूस्ट

नई दिल्ली : भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया है। करीब 2,367 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह भारत की निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

इस मिशन की खास बात यह है कि EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में रहकर पृथ्वी पर नजर रखेगा। इससे भारत को लगातार और तेजी से महत्वपूर्ण तस्वीरें व डेटा हासिल करने में मदद मिलेगी।

हर 5 मिनट में मिलेगी नई तस्वीर

EOS-05 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लगभग हर 5 मिनट में तस्वीरें उपलब्ध करा सकेगा। यानी किसी इलाके की स्थिति जानने के लिए केवल एक समय की तस्वीर पर निर्भर रहने के बजाय लगातार अपडेट मिल सकेंगे। सीमा क्षेत्रों, मौसम और आपदा जैसी परिस्थितियों में यह क्षमता काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

पाकिस्तान-चीन सीमा पर भी निगरानी?

उपग्रह की निगरानी क्षमता को देखते हुए इसे भारत की रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इससे मिलने वाला डेटा सुरक्षा एजेंसियों के लिए मददगार हो सकता है। हालांकि, उपग्रह का मुख्य उपयोग अर्थ ऑब्जर्वेशन, मौसम और आपदा निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी होगा।

चक्रवात से जंगल की आग तक मिलेगी मदद

EOS-05 केवल सुरक्षा के लिए ही अहम नहीं है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात, बाढ़, जंगलों में लगने वाली आग और मौसम में होने वाले बदलावों की निगरानी में भी इससे मदद मिल सकती है। समय पर मिलने वाला डेटा प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों की बेहतर तैयारी करने में मदद कर सकता है।

GSLV के ‘नॉटी बॉय’ ने फिर दिखाया दम

इस मिशन में इस्तेमाल हुआ GSLV Mk-II रॉकेट लंबे समय से अपने उतार-चढ़ाव के कारण ISRO में मजाकिया तौर पर ‘नॉटी बॉय’ के नाम से चर्चा में रहा है। लेकिन इस बार रॉकेट ने सफल उड़ान भरते हुए उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचा दिया। ISRO के प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, उपग्रह पूरी तरह सुरक्षित है और इसके सोलर पैनल भी सफलतापूर्वक खुल गए हैं। यह सफलता ISRO के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि पिछली कुछ चुनौतियों के बाद इस मिशन की सफलता ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया है।

2026 में ISRO की एक और बड़ी उपलब्धि

EOS-05 की सफल लॉन्चिंग भारत के लिए सिर्फ एक और अंतरिक्ष मिशन नहीं है। यह देश की आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। अब इस सफलता के बाद ISRO की नजर आने वाली बड़ी अंतरिक्ष परियोजनाओं पर है।

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