Indian Railway Bullet Train : भारत अब हाई-स्पीड रेल के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। देश की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन को विकसित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। खास बात यह है कि इस ट्रेन को भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। शुरुआती ट्रेन की रफ्तार 280 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है और आगे चलकर इसे 350 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले जाने की योजना है।
₹866.87 करोड़ का मिला बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने हाई-स्पीड ट्रेनसेट के निर्माण के लिए BEML Limited को करीब ₹866.87 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इसके तहत दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट के प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। रेलवे का लक्ष्य मार्च 2027 तक पहला प्रोटोटाइप तैयार करने का है। इसके बाद RDSO की ओर से ट्रेन की टेस्टिंग की जाएगी। अगर परीक्षण और बाकी प्रक्रियाएं तय योजना के मुताबिक पूरी होती हैं, तो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण में अगस्त 2027 तक हाई-स्पीड ट्रेन सेवा शुरू होने की उम्मीद है।
बेंगलुरु में तैयार हो रहा खास हाई-स्पीड रेल कॉम्प्लेक्स
स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण के लिए BEML ने बेंगलुरु में ‘आदित्य’ नाम का विशेष हाई-स्पीड रेल कॉम्प्लेक्स तैयार किया है। इससे भारत में हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दोनों प्रोटोटाइप ट्रेनसेट में 8-8 कोच होंगे। ट्रेन को आधुनिक तकनीक और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।
यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
इस हाई-स्पीड ट्रेन में पूरी तरह वातानुकूलित चेयर-कार कोच होंगे। यात्रियों के लिए अत्याधुनिक ऑनबोर्ड इंफोटेनमेंट सिस्टम, पुश-बैक सीटें और 360 डिग्री घूमने वाली सीटों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
भारतीय मौसम के हिसाब से होगी डिजाइन
जापान और यूरोप में चलने वाली हाई-स्पीड ट्रेनों से अलग भारतीय ट्रेन को देश के गर्म मौसम, धूल और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। ट्रेन के निर्माण में स्टेनलेस स्टील के इस्तेमाल की योजना है। यानी भारत सिर्फ विदेशों से हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक लेने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि धीरे-धीरे अपनी जरूरत के मुताबिक ट्रेन बनाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद तक सीमित नहीं रहेगा नेटवर्क
सरकार की योजना देश के दूसरे हिस्सों में भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार करने की है। बजट में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लंबी दूरी की यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। उदाहरण के तौर पर मुंबई-पुणे की यात्रा करीब 48 मिनट, पुणे-हैदराबाद करीब 1 घंटे 55 मिनट और दिल्ली-वाराणसी की यात्रा करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
आम यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
अगर यह योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में भारत में ट्रेन यात्रा का अनुभव काफी बदल सकता है। तेज रफ्तार के साथ आधुनिक सुविधाएं और भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक तैयार की गई तकनीक हाई-स्पीड रेल को देश के परिवहन क्षेत्र का नया चेहरा बना सकती है।


