नागपुर : हथकरघा सिर्फ कपड़ा बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक कला, संस्कृति और बुनकरों की मेहनत की पहचान है। इसी विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से नागपुर में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उत्साह के साथ मनाया गया।2भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय के अंतर्गत नागपुर स्थित बुनकर सेवा केंद्र की ओर से कळमेश्वर के धापेवाड़ा-कळमेश्वर राष्ट्रीय महामार्ग के पास स्थित धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के साझा कारखाने में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य राजीव भास्करराव पोतदार, पूर्व उपविभागीय दंडाधिकारी एवं धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक सुधीर दिवे, नागपुर की गांधी हैंडलूम की संचालक निधि गांधी और कंपनी की निदेशक राजश्री बापट प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। इस अवसर पर बुनकर सेवा केंद्र के उपनिदेशक (बुनाई) संदीप पी. ठुबरीकर और सहायक निदेशक (बुनाई) एम. वी. पौनीकर भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की ओर से पुरस्कार प्राप्त करने वाले बुनकरों के साथ ही भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विकास कार्यक्रम के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर बुनकरों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली और उनके काम को नई पहचान मिलने का उत्साह भी नजर आया। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह आयोजन पारंपरिक बुनाई से जुड़े कारीगरों की मेहनत और उनकी कला को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को हथकरघा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


