नागपुर : महाराष्ट्र के चार बाघ प्रकल्पों के संरक्षण को लेकर बड़ा सवाल सामने आया है। मेळघाट, पेंच, बोर और सह्याद्री टाइगर रिजर्व के संरक्षण प्लान अभी तक राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने NTCA से जवाब मांगा है।
मामला बाघों की मौत से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। न्यायालयीन मित्र एडवोकेट चैतन्य ध्रुव ने समाचार रिपोर्ट के आधार पर अदालत को बताया कि राज्य के चार बाघ प्रकल्पों के संरक्षण प्लान मंजूरी के लिए लंबित हैं। इसके बाद अदालत ने NTCA को तीन सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम. एस. रेड्डी ने 8 सितंबर को NTCA के सदस्य सचिव को पत्र भेजकर चारों बाघ प्रकल्पों के संरक्षण प्लान को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया था। मेळघाट, पेंच और सह्याद्री के प्लान अक्टूबर-नवंबर 2025 में NTCA को मंजूरी के लिए भेजे गए थे। वहीं, बोर टाइगर रिजर्व का संरक्षण प्लान 2016 से लंबित होने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई।
बाघों की मौत के आंकड़ों पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान बाघों की मौत के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा भी सामने आया। न्यायालयीन मित्र के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच NTCA की केंद्रीय सूचना प्रणाली में दर्ज 16 बाघों की मौत राज्य की आधिकारिक संख्या में शामिल नहीं थी। NTCA की ओर से मौखिक रूप से बताया गया कि हर मामले की पुष्टि में लगने वाले समय के कारण यह अंतर सामने आया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण पर भी NTCA से लिखित जवाब मांगा है। राज्य सरकार की ओर से 14 जनवरी, 23 मार्च, 15 मई और 29 मई 2026 को जवाब भेजे जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।
संरक्षण प्लान की मंजूरी क्यों अहम?
बाघों के संरक्षण के लिए सिर्फ जंगल और बाघों की संख्या पर नजर रखना ही काफी नहीं है। संरक्षण प्लान के जरिए बाघों के आवास, सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़ी दिशा तय की जाती है। ऐसे में इन योजनाओं की मंजूरी में देरी का मुद्दा अब हाईकोर्ट की निगरानी में है। सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के फैसले में भी बाघ संरक्षण योजनाएं तैयार करने, उन्हें मंजूरी देने और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया था। इसी पृष्ठभूमि में नागपुर खंडपीठ ने NTCA से तीन सप्ताह में लिखित जवाब मांगा है। इस मामले में NTCA की ओर से डेप्युटी सॉलिसिटर जनरल कार्तिक शुकुल ने पक्ष रखा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास के समक्ष हुई।


