SIR को लेकर ज्ञानेश कुमार पर बढ़ा कानूनी दबाव, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

याचिका में फौजदारी कार्रवाई और SIR से जुड़े फैसलों की जांच की मांग

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद अब अदालत तक पहुंच गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। साथ ही ज्ञानेश कुमार और कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई की मांग भी की गई है।

यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है और इसे अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से पेश किया गया है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर में कथित बदलाव और Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

आखिर विवाद किस बात पर है?

मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। याचिका में इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले आयोग के बहुमत की सहमति के बिना लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आयोग के भीतर लिखित टिप्पणियां सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। याचिका में मांग की गई है कि कथित तौर पर बिना बहुमत की सहमति के लिए गए फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों की वैधता की जांच की जाए। साथ ही Form 6 के मूल प्रारूप को बहाल करने की मांग भी की गई है।

सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, हाई कोर्ट में भी चुनौती

SIR का मामला महाराष्ट्र में भी कानूनी मोर्चे पर पहुंच चुका है। मुंबई हाई कोर्ट में दायर याचिका में SIR से जुड़े 14 फैसलों को चुनौती दी गई है। इसमें हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने और महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की गई है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने SIR के दौरान मतदाता सूची और Form 6 में कथित बदलावों को लेकर कार्रवाई की मांग की है।अब इस पूरे मामले की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर है। फिलहाल ये सभी आरोप याचिकाओं और शिकायतों में लगाए गए दावे हैं; अदालत की ओर से इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

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