मुंबई : कोपर्डी बलात्कार-हत्या मामले में फांसी की सजा की पुष्टि से पहले मुंबई हाईकोर्ट घटनास्थल की प्रत्यक्ष पाहणी करेगा। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की खंडपीठ 2 अक्टूबर को कोपर्डी पहुंचकर घटनास्थल और उसके आसपास की भौगोलिक स्थिति को समझेगी।
कोर्ट यह देखेगा कि जिन जगहों से गवाहों ने आरोपियों की गतिविधियां देखने की बात कही है, वहां से वास्तव में घटनास्थल और रास्ता दिखाई देता था या नहीं। साथ ही, आरोपियों की आवाजाही को उस स्थान से देख पाना संभव था या नहीं, इसकी भी प्रत्यक्ष पड़ताल की जाएगी। इस मामले में पीड़ित लड़की की साइकिल एक जगह, जबकि उसके कपड़े दूसरी दिशा में स्थित खेत में मिले थे। इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी और आसपास की जमीन की वास्तविक बनावट को समझना भी कोर्ट की इस पड़ताल का अहम हिस्सा होगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह पाहणी कोई नया सबूत जुटाने के लिए नहीं की जा रही है। इसका उद्देश्य निचली अदालत के सामने दर्ज किए गए सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन करने में मदद लेना है। खासकर घटना के समय का घटनाक्रम, गवाहों की स्थिति और आरोपियों की कथित गतिविधियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी माना गया है।
क्या है पूरा मामला?
13 जुलाई 2016 को अहिल्यानगर जिले के कोपर्डी में 15 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में विशेष अदालत ने नवंबर 2017 में तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की, जबकि राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए याचिका दायर की। मामले के तीसरे दोषी जितेंद्र शिंदे की सितंबर 2023 में जेल में मौत हो चुकी है। अब फांसी की सजा की पुष्टि से जुड़े निर्णय से पहले हाईकोर्ट खुद घटनास्थल की स्थिति को समझने जा रहा है।


