नागपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के क्रियान्वयन को लेकर पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे ने विधानसभा में गंभीर सवाल उठाए। मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को उन्होंने नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) के तहत बनाए गए आवासों की गुणवत्ता, मूलभूत सुविधाओं की कमी और MHADA के अंतर्गत मंजूर एक आवास परियोजना से जुड़े मुद्दों को सदन में रखा। उन्होंने इन मामलों की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
विकास ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जून 2016 में शुरू की गई थी। इस योजना के लिए नागपुर महानगरपालिका को नोडल एजेंसी बनाया गया था। वर्ष 2016 में योजना के लिए 75 हजार से अधिक नागरिकों ने पंजीकरण कराया था। उन्होंने कहा कि नागपुर शहर में आवास की जरूरत वाले लाभार्थियों की संख्या दो लाख से अधिक है।
उन्होंने कहा कि योजना शुरू हुए करीब दस वर्ष बीतने के बाद भी नागपुर शहर में पांच हजार से कम लाभार्थियों को ही आवास का कब्जा मिल पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2016 में किए गए पंजीकरण के बावजूद नागरिकों से बार-बार नए आवेदन मांगे जाते हैं, जिससे उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
तरोड़ी स्थित PMAY आवासों की गुणवत्ता पर सवाल
विधायक विकास ठाकरे ने मौजा तरोड़ी (खुर्द), खसरा क्रमांक 62 और 63 में NIT द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए करीब 3,500 आवासों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आवासों की आंतरिक सड़कें एक वर्ष के भीतर खराब हो गईं और कई मकानों में बारिश का पानी रिसने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि कॉलोनी में जलभराव की समस्या भी बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां नियमित पेयजल व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाएं, उद्यान, खेल मैदान, व्यायामशाला और समाज भवन जैसी सुविधाएं अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं।
विकास ठाकरे ने रखरखाव शुल्क के नाम पर प्रत्येक लाभार्थी से 25 हजार रुपये लिए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यह राशि संबंधित हाउसिंग सोसायटियों को हस्तांतरित की गई है या नहीं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कामों की गुणवत्ता और देरी की शिकायतों के बावजूद संबंधित ठेकेदारों के बिलों का भुगतान किया गया।
वानाडोंगरी MHADA परियोजना पर भी उठाए सवाल
विधानसभा में विधायक ठाकरे ने नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के वानाडोंगरी स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना की एक परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में 18 मीटर सड़क, फायर NOC और अन्य आवश्यक अनुमतियों को लेकर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी हुए बिना ही परियोजना को मंजूरी दी गई। उन्होंने मांग की कि इस मामले में संबंधित बिल्डर और MHADA अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। साथ ही सभी मंजूरियों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
राजनगर और संत ज्ञानेश्वर नगर पुनर्वास का मुद्दा
विकास ठाकरे ने पश्चिम नागपुर के राजनगर और संत ज्ञानेश्वर नगर की अधिसूचित झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना झुग्गियों को हटाए जाने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन प्रभावित नागरिकों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए आवासों में जल्द पुनर्वास किया जाएगा या नहीं। विधानसभा में PMAY से जुड़े इन तीनों मुद्दों को उठाते हुए विधायक विकास ठाकरे ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और जरूरतमंदों को जल्द आवास उपलब्ध कराने की मांग की।


