पुणे : महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। एस. एम. जोशी पुल पर पिछले पांच दिनों से चल रहे इस आंदोलन को विपक्ष का भी समर्थन मिल रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार किसी को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि MPSC अध्यक्ष को हटाने या उनका इस्तीफा लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत आयोग के अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया राष्ट्रपति के स्तर पर होती है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश जरूरी होती है। फडणवीस ने सवाल उठाया कि जिस समय पेपर लीक हुआ, उस समय मौजूदा अध्यक्ष पद पर थे ही नहीं। ऐसे में बिना जांच के उन्हें हटाने की मांग करना कितना उचित है, इस पर भी विचार होना चाहिए।
‘पूरे आयोग की जांच के लिए सरकार तैयार’
छात्रों के मन में विश्वास पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पूरे आयोग की जांच कराने की तैयारी दिखाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष के साथ-साथ पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल की भी जांच की जा सकती है। सरकार ने इस संबंध में राज्यपाल से अनुरोध किया है। फडणवीस के मुताबिक, अगर जांच में अनुच्छेद 317 के तहत किसी तरह का गैरप्रकार सामने आता है, तो राष्ट्रपति को कार्रवाई की सिफारिश करने में सरकार पीछे नहीं हटेगी।
‘हमें किसी को बचाना नहीं है’
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को बचाना नहीं है। अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। पांच दिन से सड़क पर बैठे MPSC छात्रों की मांग अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रही, बल्कि उनके भरोसे से भी जुड़ गई है। सरकार की ओर से जांच का भरोसा दिया गया है, लेकिन छात्रों का आंदोलन अभी भी जारी है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार की जांच की पेशकश पर आंदोलनकारी छात्र क्या रुख अपनाते हैं।


