MLC Election 2026: विधान परिषद की 5 सीटों पर मतदान शुरू, 182 उम्मीदवार मैदान में; दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

पुणे, नागपुर, अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर में मतदान जारी, 10 लाख से अधिक मतदाताओं के हाथ में उम्मीदवारों का भविष्य

महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम है। विधान परिषद की पांच सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान शुरू हो गया है। तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहे इस चुनाव में कुल 182 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सुबह 8 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतदाता किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना विश्वास जताते हैं और विधान परिषद की इन पांच सीटों पर कौन बाजी मारता है।

पांच सीटों पर चुनाव, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

इस चुनाव में पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ ही पुणे और अमरावती के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है। कुल पांच सीटों के लिए 182 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव को केवल उम्मीदवारों की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि राजनीतिक दलों की ताकत और उनके संगठनात्मक प्रभाव की भी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं, कई निर्वाचन क्षेत्रों में बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

कहां कितने मतदाता कर रहे मतदान?

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में छह जिलों के 445 मतदान केंद्रों पर मतदान की व्यवस्था की गई है। यहां 22,55,603 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पुणे स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पुणे, सोलापुर, सातारा, सांगली और कोल्हापुर जिलों में मतदान हो रहा है। इन क्षेत्रों में 1,05,084 मतदाता मतदान करेंगे। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत मराठवाड़ा के आठ जिलों में 842 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। यहां 3 लाख 26 हजार 700 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वहीं, अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81 मतदान केंद्रों पर मतदान हो रहा है। इस क्षेत्र में 35,810 शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।

मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी

मतदान के दौरान मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज दिखाना अनिवार्य है। मतदाता फोटो पहचान पत्र के अलावा 10 अन्य पहचान पत्रों को भी मान्यता दी गई है। इनमें आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, सरकारी या निजी संस्थानों द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र, सांसद-विधायक या विधान परिषद सदस्य के आधिकारिक पहचान पत्र, शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र, मूल डिग्री या डिप्लोमा प्रमाणपत्र, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और यूनिक डिसेबिलिटी पहचान पत्र शामिल हैं। मतदाता इनमें से किसी एक मान्य पहचान पत्र को दिखाकर मतदान कर सकते हैं।

अब सबकी नजरें नतीजों पर

विधान परिषद की इन पांच सीटों के लिए हो रहे मतदान में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव में दांव पर लगी है। अब सवाल यही है कि मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं? क्या प्रमुख राजनीतिक दल अपनी पकड़ मजबूत कर पाएंगे या फिर बागी और निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी समीकरण बदल देंगे? इसका जवाब मतगणना के बाद ही सामने आएगा।

 

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