नई दिल्ली : दुनिया की अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बढ़ता निवेश अब सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक पूंजी बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि सरकारों की बढ़ती उधारी के साथ AI से जुड़े बड़े निवेश के लिए कर्ज आधारित फंडिंग भी वैश्विक स्तर पर पूंजी की मांग बढ़ा रही है।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में अनुराधा ठाकुर ने कहा कि दुनिया के सरकारी बॉन्ड अब वैश्विक GDP के 80 प्रतिशत से अधिक के बराबर हैं। ऐसे में सरकारी बॉन्ड बाजार निवेश योग्य कर्ज का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है और यही पूरे वित्तीय तंत्र में पूंजी की कीमत का एक अहम आधार भी है। सरकारों की भारी उधारी के बीच निवेशक महंगाई, राजकोषीय अनिश्चितता और लंबी अवधि के जोखिम के लिए ज्यादा रिटर्न की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.34 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो 2002 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं जापान में भी लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड 1996 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। इसका सीधा असर उभरते बाजारों पर पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर पूंजी की लागत बढ़ने से इनके लिए वित्त जुटाना महंगा हो सकता है।
AI निवेश भी बढ़ा रहा पूंजी का दबाव
अनुराधा ठाकुर के मुताबिक AI के विस्तार के लिए डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, बिजली और ट्रांसमिशन जैसी सुविधाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इस निवेश का एक बढ़ता हिस्सा कर्ज के जरिए पूरा किया जा रहा है। ऐसे में अब वैश्विक बॉन्ड यील्ड को सिर्फ मौद्रिक नीति या सरकारी घाटे के नजरिए से समझना पर्याप्त नहीं है। AI के बड़े पैमाने पर हो रहे विस्तार को भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार में बढ़ते सुरक्षा और भू-राजनीतिक हितों के कारण वैश्विक स्तर पर वस्तुओं और पूंजी का प्रवाह पहले की तुलना में कम प्रभावी हो सकता है। इससे वैश्विक पूंजी की कीमत पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
भारत में निजी निवेश से उम्मीद
अनुराधा ठाकुर ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर भी पेश की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कमजोर रहने के बाद भारत में निजी पूंजी निवेश में अब सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पूंजी निर्माण तीन साल से ज्यादा समय में सबसे तेज गति से बढ़ा है। बिजली, डेटा सेंटर और धातु क्षेत्र में निजी कंपनियां नई परियोजनाओं के लिए निवेश कर रही हैं। बैंकों की ओर से भी उद्योगों को कर्ज देने में बढ़ोतरी हुई है, जिसमें बड़े और मध्यम उद्योगों के साथ सूक्ष्म और लघु उद्यम भी शामिल हैं।
FDI के आंकड़ों में भी भारत पर भरोसा
आर्थिक मामलों की सचिव ने कहा कि भारत के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी FDI अब केवल कम लागत वाले उत्पादन केंद्र के रूप में देश की पहचान तक सीमित नहीं है। वैश्विक कंपनियां भारत में क्षमता निर्माण के लिए भी निवेश कर रही हैं, जो देश की आर्थिक बुनियाद पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सकल FDI प्रवाह करीब 97 अरब डॉलर रहा। वहीं वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में यह 29.3 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2026 में भारत में शुद्ध FDI करीब 7 अरब डॉलर रहा। मौजूदा निवेशकों द्वारा पूंजी की वापसी और भारतीय कंपनियों के विदेश में निवेश का असर शुद्ध FDI के आंकड़ों पर पड़ा। अनुराधा ठाकुर ने कहा कि भारत अपने सुधारों और संतुलित आर्थिक नीतियों के जरिए आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर निष्पक्ष नियमों और मजबूत साझेदारियों के साथ आगे बढ़ना ही टिकाऊ आर्थिक विकास और वैश्विक वृद्धि के लिए बेहतर रास्ता है।


