भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए आठ अत्याधुनिक अगली पीढ़ी के युद्धपोत बनाए जाएंगे। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ कुल 53,866.50 करोड़ रुपये का करार किया है। इन युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से समुद्र में भारत की निगरानी और दुश्मन के खतरों का मुकाबला करने की क्षमता पहले से अधिक मजबूत होगी।
2 नवंबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परियोजना पर खुशी जाहिर करते हुए इसे भारतीय रक्षा क्षेत्र और स्वदेशी जहाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
क्या होगी इन युद्धपोतों की खासियत?
ये अगली पीढ़ी के युद्धपोत आधुनिक मिसाइलों, हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस होंगे। इनकी मदद से भारतीय नौसेना हवाई, समुद्री और पानी के भीतर से आने वाले खतरों का प्रभावी तरीके से सामना कर सकेगी। समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने और पनडुब्बियों का पता लगाकर उनका मुकाबला करने जैसे अहम अभियानों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा तटीय सुरक्षा मजबूत करने, उथले समुद्री क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाने और समुद्री सीमाओं पर लगातार निगरानी रखने में भी ये युद्धपोत मददगार साबित होंगे।
स्वदेशी निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी युद्धपोतों का निर्माण रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से किया जाएगा। इन सभी आठ युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना खुद तैयार करेगी। परियोजना के तहत कोलकाता स्थित GRSE पांच युद्धपोत बनाएगा, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तीन युद्धपोतों का निर्माण करेगा।
रोजगार के भी खुलेंगे नए अवसर
यह परियोजना सिर्फ नौसेना की ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के रोजगार और औद्योगिक विकास को भी गति देगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, अगले दस वर्षों में शिपयार्ड में लगभग 72 लाख पर्सन-डे और सहायक उद्योगों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में करीब 460 लाख पर्सन-डे रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
कुल मिलाकर, 53,866 करोड़ रुपये की यह परियोजना भारत की समुद्री सुरक्षा, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को नई दिशा देने वाली है। आने वाले वर्षों में इन युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी और ताकत को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


