अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का मामला अब अगले कानूनी पड़ाव पर पहुंच गया है। इस मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की ओर से आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार करेगा।
सोमवार को इस मामले की अहम सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने हुई। याचिकाकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अदालत ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे इस मामले में स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के लिए उस ट्रायल कोर्ट का रुख कर सकते हैं, जहां मुकदमा लंबित है। अदालत ने यह भी कहा कि अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट के माध्यम से पूरी की जाएगी।
पीड़ितों को अदालत में सहयोग की अनुमति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता पर भी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि यह केवल आरोपी और राज्य के बीच का सामान्य आपराधिक मुकदमा नहीं है, बल्कि इसमें सार्वजनिक हित का पहलू भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस तरह कानून किसी अपराध के पीड़ितों को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने की अनुमति देता है, उसी तरह याचिकाकर्ताओं को भी अदालत की कार्यवाही में सहयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।
दरअसल, राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी दान की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद काफी चर्चा हुई थी। इस संबंध में जून महीने में आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी। अब पुलिस की ओर से आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगे की जिम्मेदारी ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दी है। इस फैसले के बाद अब सभी की नजर ट्रायल कोर्ट की आगामी सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर रहेगी।


