नागपुर : अक्टूबर में बढ़ती गर्मी के बीच महाराष्ट्र में बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बनाया। मुंबई समेत पूरे राज्य में 10 अक्टूबर को बिजली की मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंच गई। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना और प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से मिलने वाली सौर ऊर्जा ने बिजली व्यवस्था को बड़ी राहत दी। इन योजनाओं के कारण न केवल बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिली, बल्कि बिजली खरीद पर होने वाले खर्च में भी बचत हुई।
बढ़ती गर्मी के कारण घरों में पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा राज्य के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। खासकर खेती के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सौर ऊर्जा से 5,100 मेगावाट बिजली उपलब्ध
महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के अनुसार, 10 अक्टूबर को राज्य की बिजली मांग का एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा हुआ। इस दिन बिजली ग्रिड से 32,921 मेगावाट बिजली की मांग दर्ज की गई, जबकि मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना और प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से 5,100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हुई। इस तरह राज्य की वास्तविक बिजली मांग 38,021 मेगावाट रही।
सौर ऊर्जा की खासियत यह है कि इससे दिन के समय बिजली की उपलब्धता बढ़ती है। वहीं, छतों पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्रों से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर होने से मुख्य बिजली ग्रिड पर भी दबाव कम होता है।
48 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य
महाराष्ट्र में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत 16,000 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य के सभी 48 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने की दिशा में यह काम किया जा रहा है। अब तक 7,000 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा प्रकल्प शुरू हो चुके हैं। इस योजना और कुछ तकनीकी उपायों की मदद से राज्य में लगभग 80 प्रतिशत कृषि पंपों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। रात के बजाय दिन में बिजली मिलने से उन्हें सिंचाई की योजना बनाने में सुविधा होती है। साथ ही, खेती के लिए बिजली आपूर्ति का प्रबंधन भी आसान होता है।
सस्ती बिजली से 384 करोड़ रुपये की बचत
मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना का लाभ केवल बिजली की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। इस योजना के तहत औसतन 3 रुपये 9 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध हो रही है। इससे रात के समय महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम हो रही है। सितंबर महीने में इस योजना के माध्यम से 878 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध कराई गई। वहीं, कृषि पंपों का लगभग 2,500 मेगावाट का बिजली भार रात से दिन में स्थानांतरित होने के कारण अधिकतम बिजली दरों की तुलना में बिजली खरीद पर 384 करोड़ रुपये की बचत हुई। यानी इस योजना से किसानों को दिन में बिजली, बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद और बिजली खरीद के खर्च में बचत जैसे तीन बड़े फायदे मिल रहे हैं।
11 लाख उपभोक्ताओं ने छतों पर लगाए सौर ऊर्जा संयंत्र
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत महाराष्ट्र में करीब 11 लाख बिजली उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 7,175 मेगावाट तक पहुंच गई है। छतों पर सौर ऊर्जा उत्पादन होने से उपभोक्ता अपनी बिजली की जरूरत का कुछ हिस्सा खुद पूरा कर सकते हैं। इससे बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम होती है और बिजली व्यवस्था को अतिरिक्त सहायता मिलती है।
सौर ऊर्जा से बिजली व्यवस्था को मिल रहा सहारा
महाराष्ट्र में बढ़ती बिजली मांग के बीच सौर ऊर्जा योजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। यदि स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध नहीं होती, तो बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त भार पड़ सकता था। ऐसे में सौर ऊर्जा परियोजनाएं राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही हैं। बढ़ती गर्मी और खेती के लिए बिजली की जरूरत के बीच इन योजनाओं से मिली राहत बताती है कि सौर ऊर्जा केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों और आम बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।


