डॉ. नंदिनी खाडे ✍️
नवदुर्गा के नौ रूपों में से एक हैं कात्यायनी माता का रूप.. यह मां दुर्गा का छठवां रूप माना जाता हैं. और नवरात्रि पर्व की षष्ठी तिथि (छठे दिन) को मां कात्यायनी की विशेष पूजा की जाती है. एक मान्यता के अनुसार, कात्य गोत्र के ऋषि महर्षि कात्यायन ने मां दुर्गा को पुत्री के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठिन तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के तेज से, मां दुर्गा ने महर्षि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा.
इनका जन्म तब हुआ था जब महिषासुर नाम के दानव ने पृथ्वीपर अपने आतंक से त्रिलोक को भयभीत किया था. माता कात्यायनी ने अत्याचारी दानव महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त किया, इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता ह इनका वर्ण सतेज और स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर होता है इनके स्वरूप का वर्णन करें तो इनकी चार भुजाएं हैं, उनका ऊपरी दाया हाथ अभय मुद्रा और निचला दाएं हाथ वर मुद्रा होता है, बाएं हाथ में तलवार और दूसरे बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है.
यह अतीव वात्सल्यमयी, कुटुंबकारिणी, दयालु, रक्षा के लिए वचनबद्ध तथा मातृत्वभाव से सराबोर हैं मां कात्यायनी सिंह (शेर) पर विराजमान हैं, जो उनकी निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक है. इन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने यमुना तट पर इनकी पूजा की थी.
मां कात्यायनी का बीज मंत्र – ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
तथा विवाह हेतू मंत्र हैं – ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः
तथा प्रार्थना मंत्र हैं – चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी
कात्यायनी माता को शहद और पीले रंग की वस्तुओं का भोग अत्यंत प्रिय हैं.
कात्यायनी मां ने सुंदरसा हरा वस्त्र परिधान किया हैं.
हरा रंग प्रकृति, हरियाली, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक है. यह जीवन में संतुलन बनाए रखने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है. यह समृद्धि और सकारात्मकता दर्शाता हैं.यह भारत जैसे कृषिप्रधान देश की हरिभरी प्राकृतिक संपदा, भारतीय तिरंगे की सबसे निचली पट्टी, का भी प्रतीक हैं हरा रंग शांति तथा तनाव मुक्ति का द्योतक हैं. यह ताजगी, सृजनशीलता तथा संतुलन का भी प्रतीक हैं.वर्षा ऋतु शुरू होने के पहले संपूर्ण सृष्टि सुखीसी नजर आती हैं, मगर वर्षा ऋतु के बाद संपूर्ण सृष्टि को मानों विधाता ने हरे रंग के वस्त्र पहना दिए हो ऐसा प्रतीत होता हैं, एक नए जीवन की शुरुआत दर्शानेवाला यह हरा रंग संपूर्ण चराचर में नया संजीवन पैदा करता हैं, चारो ओर हरियाली देखकर ऐसा लगता हैं जैसे हमारी आंखों में बसे सपनों को भी नए अंकुर उगे हैं, सृष्टि में चहुंओर कोई शुभंकरसी आहटें आने लगती हैं, प्रसन्नता में सराबोर चराचर में नई जान फूंक देता हैं हरा रंग…
हरा रंग स्त्रियों के लिए शुभता एवं सौभाग्य का भी प्रतीक होता हैं, यह स्थैर्य और सुकून का भी एहसास कराता हैं. इसलिए तो मां कात्यायनी ने इसे परिधान किया हैं.तो चलिए, आज नवरात्रि पर्व के इस छठे दिन हम मां कात्यायनी का मनोभाव से पूजन करते हैं, तथा प्रार्थना करते हैं की सारे संसार में सुख, संपन्नता, शांति बनी रहें, और हरियाली के समान सभी जनलोक प्रसन्नता से रहें.
जय मां कात्यायनी.



