वंदना विष्णू पांडे ✍️
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता l
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ll
आदिशक्ती दुर्गा का यह पाँचवा रूप, माँ स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. जिसका अस्त्र और शस्त्र कमल पुष्प है. जिसका वाहन सिंह है . नवरात्री के पांचवे दिन उपर दिये गये मंत्र का जाप करनेसे अभिष्टसिद्धी प्राप्त होती है . नवरात्री के चार दिन और चार राते बीच चुकी है. अब साधक का मन भक्ती मे लीन हो रहा है . साधक के अंतर्मन में ओज एवम् शक्ती बढ रही है और साधक का मन अब विशुद्धचक्र मे स्थिर हो रहा है.
नवरात्री के देवी का एक और रूप, माँ स्कंदमाता के रूप मे प्रस्थापित हो चुका है . माँ स्कंदमाता का पुत्र, भगवान स्कंद , जिसे कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाना जाता है. जब देव और असुर का संग्राम हुआ ,तब कार्तिकेय भगवान, देवों के सेनापती बने थे. कार्तिकेय भगवान ने तारकासुर का अंत किया. स्कंदमाता की कृपा से कार्तिकेय को ज्ञान एवं संस्कार प्राप्त हुए. तारकासुर अहंकार, कुतर्क एवं रुढ़िवादिता का प्रतीक है. संस्कारी और पराक्रमी पुत्र कार्तिकेय द्वारा इसका संहार हुआ. माँ स्कंदमाता सिखाती है की, अपने परिवार एवं स्वयम् मे संस्कारोंका सिंचन करे. जीवन मे जब विवेकपूर्ण आचरण होता है, तब हठ और दुर्गुणोंका स्वयं ही नाश हो जाता है .
स्कंद याने कार्तिकेय की माँ स्कंदमाता, यह दुर्गादेवी का ही रूप है. माँ स्कंदमाता चार भुजाधारी है. दाहिनी भुजा मे कमलपुष्प है.यह उपरकी ओर उठी है. दुसरी भुजा वरमुद्रा है. तथा बायी भुजा आशीर्वाद के रूप मे उपर उठी है. यह वरमुद्रा है. उसके नीचे की भुजा कमल का पुष्प लिये हुए है. माँ स्कंदमाता कमलपुष्प के आसनपर विराजमान है, इसलिये इसे पद्मासना भी कहा जाता है. इनका वाहन सिंह है.
नवरात्री के पांचवे दिन का वर्णन शास्त्रों मे किया गया है. जब कोई साधक सर्वतोपरि एकाग्र चित्त से उपासना करता है तो उसे इसी मृत्युलोक मे परमशांती एवं सुख का अनुभव प्राप्त होता है.
स्कंदमाता की उपासना से भगवान स्कंद की भी उपासना सफल साध्य होती है.
देवी के मातृरूप का गौरव करने का दिन, याने नवरात्री का पाँचवा दिन. इसे ललितापंचमी भी कहा जाता है. शारदीय नवरात्री के पाँचवे दिन, माँ स्कंदमाता के मातृवत्सल रूप की पूजाअर्चा की जाती है. संतान का लालनपालन करने वाली माँ, इसलिये इसे ललिता कहा जाता है.
प्रेमरूपिणी ,प्रेमांकितजननी ऐसा भी स्कंदमाता को कहा गया है . माँ स्कंद माता द्वारा पूरे जगत पर माया एवं वात्सल्य का छत्र उत्पन्न हुआ है . लेकिन अगर कोई गलती कर रहा है , तो यह माता उसको शासन भी करती है .अपनी संतान को आत्मनिर्भर, सुसंस्कृत एवम् अच्छा इंसान बनाने के लिए स्कंदमाता को पूजना चाहिये.
नवरात्री का आज पाँचवा दिन है. स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण उसके भक्तों को अलौकिक तेज प्राप्त होता है. नवरात्रोत्सव यह सृजन का उत्सव है. सुबह के सूरज की किरणें पीत आभा लिये हुए धरती को चूमने आती है. सवेरे सवेरे स्वर्ण- पीत रंगो की भरमार सूरज की किरणोसे उत्सर्जित होती है. यह सृजन का उत्सव है.अब बीज अंकुरित होंगे. धरती माँ की गोद हरीभरी हो जायेगी. पूरी सृष्टी प्रसन्नतासे भर जायेगी. यह शरद ऋतु की महिमा है.
तेज धूप से सेंकी हुई मिट्टी, शरद ऋतु की चांदनी को धारण करते हुए ठंडक महसूस करेगी. अब हवा भी बदल जायेगी. ठंडी ठंडी लहरों मे तबदिल हो जायेगी. सूरज की पीली किरणे धरती की गोद मे आ गिरेगी. यही तो पीले रंग की महिमा है. नवरात्री का मिट्टी से भरा घट माने सृष्टी का प्रतीकात्मक रूप, घटके इर्द गिर्द धान्यके बीजों का बोना, अखंड दीये की पिली रोशनी, पीले फूलों की माला घट को सजाते हु, . मिट्टी से कोंपले फूटना अब जारी हो चुका है.
यह पीले रंग का महत्व है. आज गुरुवार है .गुरुवार के दिन पीले रंग का महत्व अनोखा होता है.
अखंड दीप तेजतत्व का प्रतिनिधी है .यह दीप मिट्टी के दीये मे रखा है. मिट्टी के दीये मे सात्विक तरंग प्रक्षेपित करने की क्षमता अधिक होती है. यह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कराता है और घर घर मे चैतन्य और उल्हास का निर्माण कराता है.
पीला रंग अपनी चमक, गर्मी, ऊर्जा के कारण बहुत खास माना जाता है. पीला रंग माने ओजस्विता, आनंद व उत्साह. नवरात्री के हर दिन मे, हर दिन की शुरुवात उत्साह पूर्ण होती है और यह बहुत विलक्षण है.
पीला रंग खुशी का प्रतीक है. धूप, ताजगी एवं सकारात्मकता का अहसास कराता है. मन को उत्साहित कराता है. पीला रंग दिन के उजाले मे बहुत दूर से ही, सबसे पहले दिखाई देता है.
हिंदू धर्म यह शुभता, पवित्रता एवम ज्ञान का रंग माना जाता है. भगवान विष्णू एवं देवगुरु बृहस्पती का यह प्रिय रंग है. गुरुवार का रंग पीला है. पीला रंग आशावाद, ऊर्जा, गरमाहट, ध्यान एवं शुभता का संकेत है.
शारदीय नवरात्र के यह पांचवे दिनमे मातृवत्सल स्कंदमाता की उपासना करनेसे भवसागर मे डुबे हुए साधक को दुखों से मुक्ती मिलती है. मोक्ष का मार्ग प्रशस्त
होता है. सबका मंगल हो.



