पुणे : राजनीति में पद की उम्मीद रखने वाले नेताओं को अब अपने काम का हिसाब भी देना होगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा के पार्षदों को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में कोई पद मांगने आएगा, तो सबसे पहले उसके काम का रिपोर्ट कार्ड देखा जाएगा। कितना और कैसा काम किया है, इसकी समीक्षा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि पार्टी में पद पाने के लिए केवल दावेदारी नहीं, बल्कि काम भी मायने रखेगा।
दरअसल, पुणे विभाग के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के भाजपा पार्षदों और पुणे जिला परिषद के भाजपा सदस्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव में अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित करने और पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए।
80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य, पार्षदों को मिली जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुणे में भाजपा की मजबूत स्थिति है, इसलिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में पार्टी को पूरी ताकत लगानी चाहिए। उन्होंने मतदान का प्रतिशत बढ़ाने पर जोर देते हुए सवाल किया कि जब कोंकण विभाग में 80 प्रतिशत मतदान हो सकता है, तो पुणे शहर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?
उन्होंने पार्षदों से अपील की कि वे अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंचें और चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। फडणवीस ने यह भी कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनाव प्रक्रिया सामान्य चुनावों से कुछ अलग होती है। ऐसे में हर मतदाता तक पहुंचना और उसे मतदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
पद मांगने से पहले काम का हिसाब देना होगा
बैठक में मुख्यमंत्री का सबसे सख्त संदेश उन पार्षदों के लिए था, जो भविष्य में पार्टी में किसी पद की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पद के लिए दावा करने से काम नहीं चलेगा। पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित पार्षद ने अपने क्षेत्र में कितना काम किया है और उसकी कार्यशैली कैसी रही है। इस बयान को पार्टी के भीतर जवाबदेही और सक्रियता पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है। यानी अब पद की दावेदारी के साथ-साथ अपने काम का हिसाब देना भी महत्वपूर्ण होगा।
प्रचार कार्यक्रम से गायब रहने वाले पार्षद भी पहुंचे बैठक में
इस बैठक से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के हाथों पुणे विभाग के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार अभियान की शुरुआत की गई थी। इस कार्यक्रम में करीब 100 पार्षद अनुपस्थित रहे थे। इसके बाद संबंधित पार्षदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से बुलाई गई बैठक में अधिकांश पार्षद उपस्थित रहे। हालांकि, चार से पांच पार्षद अनुपस्थित थे, लेकिन उन्होंने इसके लिए पहले से अनुमति ली थी।
चुनाव के साथ संगठन की सक्रियता पर भी नजर
मुख्यमंत्री की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव में मतदान बढ़ाने के साथ-साथ पार्टी के जनप्रतिनिधियों की सक्रियता सुनिश्चित करना भी था। एक ओर भाजपा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर पार्षदों को उनके काम और जिम्मेदारियों का एहसास भी कराया जा रहा है। फडणवीस के संदेश से यह स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर पद की उम्मीद रखने वाले जनप्रतिनिधियों से अब उनके काम के आधार पर जवाब मांगा जाएगा।


