पल्लवी संदीप पांडे ✍️
या देवी सर्वभूतेषु शांती रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में शांती के रूप में स्थित उसे मैं नमन करती हू |
आज नवरात्री के पावन पर्व का दुसरा दिन | इस दिन हम हिंदू धर्म नुसार दुर्गा माता का दुसरा रुप कहलाने वाली देवी माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करते है |माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। यह रूप अत्यंत शांत, ज्योतिर्मय और भव्य है। तप का आचरण करनेवाली माँ ऐसी इनकी ख्याती हैं |देवी ब्रह्मचरणी सफेद रंग के वस्त्र परिधान करती हैं, जो अपनेआप में शांतता का प्रतीक माना जाता हैं |
सफेद रंग की बात करे तो यह रंग मुख्य रूप से मानसिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला है।
इस रंग के वस्त्र पहनने से मन को शान्ति मिलती हैं |स्थिरता और संयम में वृद्धी होती हैं |इससे ज्ञान और तपस्या की शक्ति में वृद्धि होती है। तिरंगे में यह रंग इमानदारी का प्रतीक हैं, वही सामान्य जीवन में यह शुद्धता, स्वच्छता, सादगी और नई सुरवात का प्रतीक हैं |मानसिक तौर पर यह हमे तटस्थता और स्पष्टता दर्शाता है। इतनी विशेषताओ से भरा रंग धारण करनेवाली माँ ब्रह्मचारिणी तप, स्वाध्याय और नियम की मूर्ती कहलाती हैं |
हर मानव के मन में वास करनेवाले वासना, भटकाव और चंचलतारुपी असुर से यह संघर्ष करती हैं | इन असुरो को हराना यह माँ ब्रह्मचारिणी हा मुख्य उद्देश होता हैं | इसीलिये इसके पूजन से हमे अपने चंचल मन पर काबू पाने में सफलता मिलती हैं | आज के युग में हमे हर क्षेत्र में तुरंत सफलता अपेक्षित होती हैं, जिसकेलिये हम साम, दाम, दंड, भेद की राह पर बिना सोचे आगे बढ जाते हैं | माँ ब्रह्मचारिणी के पूजन से हमे आत्मसंयम प्राप्त होता हैं, जिस वजह से हम सही गलत की पहचान कर सके, और
धीरज के मिठे फल का हम इंतजार कर सके | माँ ब्रह्मचारिणी के पूजन से हम मन की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धी कर जीवन में आनंद का अनुभव करते हैं | माँ ब्रह्मचारिणी हमें सदा शान्ति और संयम से रैहना सिखाती हैं | नवरात्री का उद्देश ही वासना पर विजय मिलाना और नारी के शक्ती रूप की पूजा हैं, तो इस नवरात्री हम शान्ति, शक्ती, विद्या,और लक्ष्मीरूप में बसने वाली हर देवी की और हर औरत की पूजा कर हमारा नवरात्री पूजन सफल बनाते हैं |



