प्रेरणा प्रदीप वाडी ✍️
“या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रुपेन संस्थीता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”
आज दिनांक ११ अक्तूबर २०२६. आज से शारदीय नवरात्री का प्रारंभ हो रहा है. नवदुर्गा की स्थापना, घट पूजन, अखंड ज्योत, भोग एवं जागरन, अखंड पाठ का आयोजन आज से नौ दिन किया जायेगा.
हिंदू मान्यता अनुसार शक्तीरुपी दुर्गा के नौ रूप होते है. राक्षसो का संहार करने हेतू माॅं दुर्गा स्वयं प्रकट हुई .नौ दिन, नौ रात्र अखंड युद्ध हुआ और नवमी के दिन राक्षसों का पतन होकर माॅं दुर्गा ने संसार को भयमुक्त किया और दशहरे के दिन माॅं सीमोलंघन के लिये निकल पडी.
नवदुर्गा के नौ रूप मे पहला है माॅं शैलपुत्री. आज नवरात्री का पहला दिन.आज है माॅं शैलपुत्री का पूजन.
शैलपुत्री पहले जनम मे दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थी. पिता द्वारा यज्ञ मे बुलावां ना आने पर भी वह गई लेकिन अपमानित हुई और क्रोधवश योगाग्नी प्रकट करते उसमे भस्म हो गई. वही सती नगराज हिमाचल की पुत्री शैलपुत्री नाम से जानी गई. पर्वत की पुत्री इसलिये पार्वती नाम से भी इन्हे जाना जाता है. हेमवती रूप मे इन्होने देवों का गर्वहरण किया था. इस जन्म मे भी उन्होने भगवान शंकर से ही विवाह किया.
माॅं शैलपुत्री का रूप अतीव स्नेहमयी, कोमलांगी, शुभांगी, कृपा बरसाती हुई माॅं स्वरूप है. माॅं शैलपुत्री ऋषभ पर सवार है. उनके दाहीने हात मे त्रिशूल एवं बाये हात मे पद्म याने कमल पुष्प धारण किया है.
मा शैलपुत्री का ध्यान
ॐ ऐं ह्रिम् क्लीम् चामुंडायै विच्चै ॐ शैलपुत्रै देव्यै नमः
इस मंत्र के १०८ बार जाप से करना है. माताजी को घी एवं गाय के दुग्ध की खीर का भोग बडा ही पसंद है.माॅं शैलापुत्री ने सुंदरसा सिंदुरी वर्ण का वस्त्र परिधान किया है.
सिंदूर या केशरिया रंग अग्नी तथा सूर्य का प्रतीक माना जाता है. सूर्योदय के समय पूर्व क्षितिज पर सिंदुरी रंग की बौछार होती है. नये दिन की शुरुआत, नयी चेतना, कार्य सिद्धी को आरंभ करती है
प्रगती एवम तेज प्राप्ति का प्रतीक माना यह रंग त्याग का भी प्रतीक है.संन्यासी जनों ने इसे अपनाया है. इस रंग को परिधान करने से अपने मन में सकारात्मक भाव एवं आत्मज्ञान की प्राप्ती होकर हमे अहम् को त्यागने की इच्छा जागृत होती है.
यह रंग उत्कर्ष एवं शक्ती का भी प्रतीक होने कारन विरों ने भी अपनाया है. और लढाई पर जाते समय उनके ध्वजौं का रंग यही केसरिया रंग हुआ करता था.
इस रंग का महत्व नारी से अच्छा और कौन जान सकता है? चुटकी भर सिंदूर उन्हे जीवनभर सौख्य, शांती, प्रेम, विश्वास की प्राप्ती करवाता है. यही कारण है माॅं शेलपुत्री ने इसे अपनाया है.यत्र तत्र सर्वत्र प्रशंसनीय एवम पूजनीय यह सिंदुरी रंग हमारे राष्ट्रध्वज मे भी अग्रक्रम पर है.
चलिये आज के इस शुभ पर्व पर हम सब माॅं शैलपुत्री को शत शत नमन करते हुए संसार मे सुख शांती बनाये रखने की प्रार्थना करेंगे. सिंदूर का खेला कर के सौख्य वृद्धी की कामना करेंगे.
माॅं शैलपुत्री की जय.



