नागपुर : शहर में पानी की उपलब्धता होने के बावजूद अगर उसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आम लोगों को पानी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के राजस्व मंत्री और नागपुर के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पानी की बर्बादी को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीने के पानी का अनावश्यक इस्तेमाल या अपव्यय करते हुए पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है।
35 प्रतिशत पानी का हिसाब ही नहीं!
नागपुर में पानी की आपूर्ति को लेकर एक अहम मुद्दा सामने आया है। बावनकुले के अनुसार, शहर में करीब 35 प्रतिशत पानी का ऑडिट नहीं हो रहा है। यानी पानी की आपूर्ति में कितना पानी उपलब्ध है, कितना नागरिकों तक पहुंचता है और कितना रिसाव या अन्य कारणों से बर्बाद होता है, इसका सही हिसाब रखना जरूरी है। पानी का ऑडिट होने से बर्बादी के कारणों का पता लगाया जा सकेगा और उन्हें रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
निर्माण कार्यों में पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं
दुष्काल जैसी परिस्थितियों को देखते हुए पानी का सोच-समझकर इस्तेमाल करना जरूरी है। बावनकुले ने प्रशासन को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में पीने के पानी का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसके बजाय ऐसे कामों के लिए प्रक्रिया के बाद उपलब्ध कराए गए पानी का उपयोग किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि पीने के पानी का अनुचित इस्तेमाल सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सीमेंट सड़कों का काम बंद
पानी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीमेंट सड़कों के निर्माण कार्य बंद किए जाने की जानकारी भी बावनकुले ने दी। पानी की जरूरत और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि नागरिकों की बुनियादी जरूरतों पर असर न पड़े।
6 हजार से अधिक छोटे बांधों की मरम्मत पर जोर
पानी की बचत के साथ जलसंधारण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नागपुर जिले में छह हजार से अधिक छोटे बांधों की मरम्मत से जलसंग्रह बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बारिश के पानी को रोकना, जलस्रोतों को सुरक्षित रखना और उपलब्ध पानी का उचित नियोजन करना भविष्य में पानी की कमी की समस्या को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
पानी बचाना अब हर नागरिक की जिम्मेदारी
पानी की समस्या केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है। घरों में, निर्माण कार्यों में और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली छोटी-छोटी बर्बादी भी उपलब्ध जलस्रोतों पर दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में पानी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करना और उसे व्यर्थ बहने से रोकना जरूरी है। प्रशासन की सख्ती के साथ नागरिकों की जागरूकता भी अहम होगी, क्योंकि पानी आज की जरूरत ही नहीं, आने वाले कल की सुरक्षा भी है।


