नागपुर में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने की तैयारी है। शहर के तीसरे रिंग रोड को अब केवल वाहनों की आवाजाही तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे भविष्य के एक बड़े मल्टीमॉडल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है। करीब 149 किलोमीटर लंबे इस मार्ग से 9 तहसीलों के 107 गांव जुड़ेंगे। सड़क के साथ मेट्रो, टाउनशिप और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास की भी योजना बनाई गई है। इस परियोजना से जहां शहर में बढ़ते ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है, वहीं गांवों के लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
सड़क के साथ मेट्रो और टाउनशिप की भी तैयारी
नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (NMRDA) की ओर से प्रस्तावित यह रिंग रोड करीब 120 मीटर चौड़ा होगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 13,748 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके लिए करीब 3,000 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। इस कॉरिडोर की खास बात यह है कि यहां केवल सड़क बनाने पर जोर नहीं होगा। भविष्य में मार्ग के मध्य से मेट्रो चलाने की योजना है। इसके अलावा पानी की आपूर्ति, सीवरेज लाइन, गैस पाइपलाइन और टाउनशिप जैसी सुविधाओं को भी एक साथ विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे नागपुर के आसपास नए आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को गति मिल सकती है। लोगों को रोजगार के लिए केवल शहर पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है।
107 गांवों को मिलेगा कनेक्टिविटी का लाभ
यह तीसरा रिंग रोड नागपुर ग्रामीण, हिंगणा, कुही, कलमेश्वर, उमरेड, सावनेर, कामठी, पारशिवनी और मौदा तहसीलों के 107 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके साथ ही सौ से अधिक गांवों की सड़कों को भी इस मार्ग से जोड़ने की योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क होने से लोगों के लिए शहर तक पहुंचना आसान हो सकता है। साथ ही, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इस परियोजना का फायदा किसानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और स्थानीय कारोबारियों तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर जमीन अधिग्रहण, निर्माण की गति और सुविधाओं के समय पर विकसित होने पर निर्भर करेगा।
भारी वाहनों से मिलेगी राहत, लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा
नागपुर में मौजूदा रिंग रोड पर बढ़ते यातायात के बीच तीसरा रिंग रोड बाहरी वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन सकता है। खासकर भारी वाहनों की आवाजाही को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से दूर रखने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत पारशिवनी तहसील के इटगांव, हिंगणा के तुरागोंदी, शिरूळ और कामठी के परसाड में करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट प्लाजा विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों से माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
जमीन अधिग्रहण और DPR पर अगला कदम
परियोजना के लिए जमीन की माप प्रक्रिया दिवाली से पहले शुरू करने की योजना बताई गई है। वहीं, आचार संहिता समाप्त होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए निविदा खोले जाने की बात कही गई है। परियोजना के लिए HUDCO से 4,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के संबंध में सरकार की गारंटी भी प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जमीन अधिग्रहण से जुड़े लेन-देन पर स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में छूट देने की भी जानकारी सामने आई है। किसानों के लिए उचित मुआवजा और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया इस परियोजना का महत्वपूर्ण पहलू होगी।
नागपुर के भविष्य के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
तीसरा रिंग रोड केवल एक नया रास्ता नहीं, बल्कि नागपुर और आसपास के गांवों के विकास की बड़ी योजना के रूप में देखा जा रहा है। बेहतर सड़कें, भविष्य में मेट्रो कनेक्टिविटी, औद्योगिक केंद्र और टाउनशिप विकसित होने से क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। अगर योजना तय समय पर जमीन पर उतरती है, तो नागपुर के साथ आसपास के गांवों को भी इसका लाभ मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि परियोजना की अगली प्रक्रियाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और विकास का फायदा स्थानीय लोगों तक किस तरह पहुंचता है।


