मुंबई/पुणे : पुणे की सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे MPSC अभ्यर्थियों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। आंदोलन से स्थानीय लोगों को परेशानी होने का दावा करते हुए अमित सुपेकर और सौरभ विरकर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के साथ-साथ आंदोलन कर रहे छात्रों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “छात्र कोई समाजविरोधी तत्व नहीं हैं।” अगर विद्यार्थियों को परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी का संदेह है, तो अपनी बात रखने के लिए आंदोलन करना उनका अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने छात्रों से अपील की कि वे न्यायपालिका पर भरोसा रखें, आंदोलन पीछे लें और दोबारा अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें।
70 हजार पदों की भर्ती पर सरकार से जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को करीब 70 हजार रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कैसे पूरी की जाएगी, इसका विस्तृत रोडमैप तीन सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से विद्यार्थियों का भरोसा जीतने की दिशा में ठोस कदम उठाने को भी कहा। न्यायालय ने कहा कि पुणे शिक्षा का बड़ा केंद्र है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा यहां अपना करियर बनाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। ऐसे में उनका भविष्य आंदोलन और विवादों में नहीं, बल्कि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में आगे बढ़ना चाहिए।
छात्रों की चार में से तीन मांगें मंजूर
सरकारी वकील मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने छात्रों की चार में से तीन मांगें मान ली हैं। इनमें राजस्थान की तर्ज पर परीक्षा शुल्क 100 रुपये करने की मांग भी शामिल है। फिलहाल आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग बाकी है। सरकारी पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि आंदोलन के कारण कुछ पुल बंद हैं और पुणे जैसे शहर में इस तरह की स्थिति ठीक नहीं है।
कुछ छात्रों ने आंदोलन वापस लेने की बात कही
सुनवाई के दौरान एक आंदोलनकारी गुट ने हाईकोर्ट में आंदोलन वापस लेने की बात कही। वहीं अहिल्या लाइब्रेरी के पास आंदोलन कर रहे छात्रों की ओर से उनके वकील ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से उचित स्थान उपलब्ध कराया जाता है, तो वहां आंदोलन जारी रखा जाएगा।
छात्रों के करियर को लेकर कोर्ट ने जताई चिंता
छात्रों के खिलाफ कार्रवाई से उनका करियर प्रभावित न हो, इसे लेकर पुलिस द्वारा संयम बरतने पर हाईकोर्ट ने भी सराहना की। साथ ही कोर्ट ने जांच एजेंसियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए कि इस पूरे मामले में असली दोषी कौन हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि छात्रों को आंदोलन के लिए उचित अनुमति लेकर निर्धारित स्थान का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो। साथ ही सरकार को सभी परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से कराने का भरोसा देने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। फिलहाल हजारों MPSC अभ्यर्थियों की नजर इस बात पर है कि सरकार तीन सप्ताह में कोर्ट के सामने क्या रोडमैप पेश करती है और उनकी बाकी मांगों पर क्या फैसला होता है।


