महाराष्ट्र में इस बार बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और किसान सूखे के संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने लोगों से आगामी धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों को सादगी से मनाने और उत्सवों पर होने वाला खर्च दुष्काळग्रस्त किसानों की मदद के लिए देने की अपील की है।
एकनाथ शिंदे पिछले कुछ दिनों से विदर्भ के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने दुष्काळग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से बातचीत की और उनकी परेशानियों को जाना। दौरे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए बारिश की कमी और किसानों की स्थिति का जिक्र किया। शिंदे ने कहा कि इस साल बारिश ने किसानों का साथ नहीं दिया और कई जगह फसलें करप गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की तिजोरी पर पहला हक बळीराजा का है। सरकार और शिवसेना किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और सरकार की ओर से हर संभव मदद की जा रही है। साथ ही उन्होंने समाज के स्तर पर भी किसानों के साथ खड़े होने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जब किसान चिंता में है, ऐसे समय में नवरात्रि समेत आगामी धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों को धूमधाम से मनाना उचित नहीं होगा। इसलिए इन उत्सवों को सादगी से मनाने और बची हुई राशि को दुष्काळग्रस्त किसानों की मदद और पुनर्वास के लिए देने की अपील उन्होंने शिवसेना पदाधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं और आम जनता से की।
शिंदे ने अपने संदेश में यह भी कहा कि अगर इस साल उत्सव का खर्च बचाकर किसानों की आंखों के आंसू पोंछे जा सकें और उनके चेहरे पर खुशी लाई जा सके, तो यही आदिशक्ति जगदंबा की सच्ची सेवा होगी। बारिश की कमी से परेशान किसानों के बीच शिंदे की यह अपील अब चर्चा में है। उनका संदेश सिर्फ उत्सवों को सादगी से मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय समाज के स्तर पर किसानों के साथ खड़े होने की बात भी सामने रखता है।


