कोल्हापुर : गुजरात के वनतारा से कोल्हापुर के नांदणी मठ वापस लाई गई हथिनी माधुरी को लेकर एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। PETA इंडिया ने याचिका दायर कर मांग की है कि माधुरी को दोबारा गुजरात के वनतारा भेजा जाए। संगठन ने इसके पीछे उसकी सेहत, रहने की परिस्थितियों और वहां के माहौल को लेकर कई बातें अदालत के सामने रखी हैं।
माधुरी करीब 33 साल तक नांदणी मठ में रही थी। इसके बाद उसके पैरों में चोट और घुटनों में सूजन जैसी परेशानियों के कारण उसे वनतारा भेजा गया था। PETA इंडिया का कहना है कि वहां वह दूसरी हथिनियों के साथ खुले वातावरण में रह रही थी, लेकिन अब मठ लौटने के बाद उसकी स्थिति बदल गई है।
शोर और भीड़ से परेशानी का दावा
PETA इंडिया की याचिका में कहा गया है कि 11-12 सितंबर को माधुरी जब कोल्हापुर वापस पहुंची, तब उसे तेज आवाजों और शोर से परेशानी हुई। संगठन का आरोप है कि मठ में फटाकों की आतिशबाजी, तेज घोषणाएं और ढोल-ताशे जैसे शोर उसके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। PETA की पॉलिसी विभाग की उपाध्यक्ष खुशबू गुप्ता के अनुसार, वनतारा में माधुरी अपनी साथी हथिनियों के साथ रहती थी, जबकि अब वह एक शेड में अकेली है। संगठन का कहना है कि यह माहौल माधुरी के लंबे समय के स्वास्थ्य और जीवन के लिए उपयुक्त नहीं है।
पुराने आदेशों का भी दिया हवाला
याचिका में यह भी कहा गया है कि पैरों की चोट, घुटनों की सूजन और लंबे समय तक कठोर जमीन पर खड़े रहने की परेशानी के कारण माधुरी के लिए मिरवणुकी में डांबरी सड़कों पर चलना मुश्किल था। इसी वजह से उसे वनतारा भेजा गया था। PETA इंडिया ने अपनी याचिका में मुंबई हाईकोर्ट के 16 जुलाई 2025 के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2025 के आदेश का भी हवाला दिया है। संगठन का दावा है कि माधुरी को दोबारा मठ लाना इन आदेशों के अनुरूप नहीं है।
अब मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है। अदालत इस याचिका पर क्या फैसला लेती है, इसी पर माधुरी का अगला ठिकाना तय होने की दिशा साफ होगी। फिलहाल माधुरी को लेकर एक बार फिर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है और सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है।


