अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका जीत की स्थिति में असल्याचा दावा केला है और साथ ही आगे भी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की प्राथमिकता है और युद्ध खत्म होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर फिर से बड़े हवाई हमले शुरू हो सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन में इस संभावना पर चर्चा हुई है। हालांकि, हमलों का स्तर और समय अभी स्पष्ट नहीं है।
ट्रम्प ने हमले की संभावना से नहीं किया इनकार
ट्रम्प से जब पूछा गया कि क्या मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर दोबारा सैन्य हमला हो सकता है, तो उन्होंने इसे संभव बताया, लेकिन इस पर विस्तार से बोलने से इनकार किया। उनका कहना है कि अमेरिका सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर ईरान पर दबाव बनाने में सफल रहा है। ट्रम्प ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी कड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरानी मुद्रा और अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और महंगाई करीब 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा ट्रम्प का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
ईरान ने भी साफ किया अपना रुख
ट्रम्प के बयानों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश किसी भी नए अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। NBC के कार्यक्रम ‘Meet the Press’ में उन्होंने कहा कि ईरान जरूरत पड़ने पर युद्ध का जवाब देगा, लेकिन साथ ही कूटनीति के रास्ते को भी खुला रखना चाहता है। यानी एक तरफ दोनों देशों के बयान लगातार सख्त होते जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही विरोधाभास आने वाले दिनों में इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है।
ईरान का 7 दिन का प्रस्ताव भी नहीं बनी बात
तनाव कम करने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें शर्तों के पूरा होने पर होर्मुज की सामुद्रधुनी को दोबारा खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका की ओर से फिर हवाई हमले शुरू होने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बातचीत की मेज पर कम होगा या फिर दोबारा सैन्य कार्रवाई की तरफ बढ़ेगा। ट्रम्प की ओर से हमले की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है, जबकि ईरान ने जवाब देने की तैयारी की बात कही है। ऐसे में आने वाले सप्ताह सिर्फ अमेरिका और ईरान के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी अहम हो सकते हैं।


