अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा एक अहम रास्ता है। लेकिन अब इस वीजा व्यवस्था को लेकर अमेरिकी प्रशासन की सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B और अन्य विदेशी कामगार वीजा कार्यक्रमों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। ऐसे में आने वाले समय में इस व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अमेरिका के श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया है कि अगले 365 दिनों में विदेशी कामगारों से जुड़ी वीजा व्यवस्था मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग दिखाई दे सकती है। उन्होंने H-1B और अन्य विदेशी कामगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।
जांच के दायरे में ऐसी कंपनियां भी हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वीजा हासिल करने के लिए किया गया। इसके अलावा श्रम कानूनों के उल्लंघन और अन्य अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी तक की संभावना जताई गई है।
भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?
अमेरिका के टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए काम करते हैं। ऐसे में नियमों में सख्ती का असर नए आवेदकों के साथ-साथ अमेरिका में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों और वीजा नवीनीकरण की प्रक्रिया में शामिल लोगों पर भी पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में H-1B आवेदन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में ज्यादा जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ सकता है।
H-1B पर 1 लाख डॉलर शुल्क का मामला
इस बीच अमेरिका ने H-1B से जुड़े प्रवेश प्रतिबंधों को 12 महीने के लिए बढ़ाया है। 21 सितंबर 2026 से लागू नई घोषणा के अनुसार, अमेरिका के बाहर से कुछ H-1B कर्मचारियों के प्रवेश के लिए याचिका के साथ 1 लाख डॉलर का शुल्क जरूरी किया गया है। हालांकि, राष्ट्रीय हित से जुड़े कुछ मामलों में अपवाद का प्रावधान है। यह प्रतिबंध 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा।
‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ से बढ़ी निगरानी
अमेरिका के श्रम विभाग ने 19 सितंबर 2025 को ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ शुरू किया था। इसका उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना, अमेरिकी कामगारों के वेतन और रोजगार के अवसरों की रक्षा करना और नियोक्ताओं से नियमों का पालन करवाना है। इस अभियान के तहत यह भी देखा जा रहा है कि कहीं अमेरिकी कामगार उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा, H-1B कर्मचारियों को गलत तरीके से प्राथमिकता तो नहीं दी जा रही या नौकरी से जुड़ी जानकारी गलत तो नहीं दी गई। नियमों का उल्लंघन मिलने पर बकाया वेतन की वसूली, जुर्माना और कुछ समय के लिए नियोक्ता को H-1B कार्यक्रम से बाहर करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
क्या H-1B वीजा पूरी तरह बंद होगा?
फिलहाल H-1B वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा स्थिति को वीजा पूरी तरह बंद होने के बजाय नियमों की सख्ती, ज्यादा जांच और कड़े अमल के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इन बदलावों का भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे युवाओं पर कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।


