मुंबई : महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे, पानी की कमी और चारे की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने तात्कालिक कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति का गठन किया गया है। इस समिति में नौ मंत्रियों के साथ मुख्य सचिव को भी सदस्य बनाया गया है। समिति का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखना और जरूरत के अनुसार किसानों तथा ग्रामीणों तक जल्द मदद पहुंचाना है।
22 सितंबर को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आपदा प्रबंधन, सहायता एवं पुनर्वास विभाग ने 23 सितंबर को इस संबंध में शासन निर्णय जारी किया। इसके तहत सूखा, पानी की कमी और चारे की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा आवश्यक फैसले लेने की जिम्मेदारी समिति को दी गई है।
जमीन पर जाकर होगी स्थिति की समीक्षा
समिति के सदस्य सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर स्थिति का आकलन नहीं करेंगे, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष दौरा भी करेंगे। हर सप्ताह बैठक लेकर सूखे की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फसल नुकसान के पंचनामों की भी समीक्षा होगी। किसानों को मिलने वाली सहायता को लेकर आवश्यक सिफारिशें की जाएंगी। इसके अलावा प्रत्येक जिले में उपलब्ध पानी के भंडार को ध्यान में रखते हुए पानी के उपयोग और वितरण की योजना बनाई जाएगी।
पशुओं के चारे पर भी रहेगा ध्यान
सूखे की स्थिति में इंसानों के साथ पशुओं के सामने भी चारे का संकट खड़ा हो सकता है। इसे देखते हुए जिलों में चारे की कमी न हो, इसके लिए जरूरी उपाय करने की जिम्मेदारी भी समिति संभालेगी। परिस्थितियों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल को तत्काल निर्णयों के लिए सिफारिशें भी भेजी जाएंगी।
समिति में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के साथ जलसंपदा एवं आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, पानीपुरवठा एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील, मृद एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठोड, पशुसंवर्धन, पर्यावरण एवं वातावरणीय बदलाव मंत्री पंकजा मुंडे, कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, सहायता एवं पुनर्वसन मंत्री मकरंद पाटील और सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील शामिल हैं।
सचिन अहिर ने भी किसानों से सीधे संवाद की बात कही
विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहिर ने भी सूखे की स्थिति को लेकर किसानों से सीधे संवाद करने की जरूरत बताई। पुणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को केवल सूखे की रिपोर्ट पर निर्भर न रहते हुए किसानों से बातचीत करनी चाहिए, ताकि जरूरत के मुताबिक तत्काल निर्णय लिए जा सकें। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सभी पालकमंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं। सूखे की मार झेल रहे किसान और ग्रामीण अब सरकार की इन बैठकों और जमीनी निरीक्षण से मिलने वाली राहत की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में समिति की सिफारिशों और सरकार के फैसलों पर नजर रहेगी।


