शेतकरी कंपनियों को सवा करोड़ का झटका! माल लिया, चेक दिए; खाते में पैसे नहीं निकले

नागपुर-चंद्रपुर की 7-8 किसान कंपनियों की रकम अटकी, कार्रवाई के लिए आर्थिक अपराध शाखा से लेकर कलेक्टर तक गुहार

नागपुर : किसानों की मेहनत से तैयार किए गए मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना किसान उत्पादक कंपनियों के लिए पहले ही बड़ी चुनौती है। ऐसे में माल खरीदने के बाद भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस होने से नागपुर और चंद्रपुर की कई किसान उत्पादक कंपनियां आर्थिक परेशानी में फंस गई हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इन कंपनियों की करीब सवा करोड़ रुपये की रकम अटक गई है।

गांव स्तर पर कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन करने के उद्देश्य से किसान कंपनियों ने अलग-अलग प्रसंस्करण उद्योग शुरू किए हैं। लेकिन तैयार माल की बिक्री के लिए पर्याप्त विपणन व्यवस्था नहीं होने से उन्हें कई बार निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी का फायदा उठाते हुए नागपुर की एक निजी कंपनी ने विभिन्न किसान उत्पादक कंपनियों से मूल्यवर्धित कृषि माल खरीदा। माल की कीमत के भुगतान के लिए कंपनी ने चेक भी दिए।

लेकिन जब किसान कंपनियों ने ये चेक बैंक में जमा किए, तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक का भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद संबंधित कंपनियों की रकम फंसने का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, नागपुर और चंद्रपुर जिले की करीब 7 से 8 किसान उत्पादक कंपनियों की राशि बकाया है।

आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत, कार्रवाई का इंतजार

मामला सामने आने के बाद संबंधित निजी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि, शिकायत पर अभी तक कार्रवाई नहीं होने का आरोप किसान कंपनियों की ओर से लगाया गया है। किसान कंपनियों की परेशानी को देखते हुए ‘आत्मा’ की परियोजना संचालक डॉ. अर्चना कडू ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से संबंधित किसान उत्पादक कंपनियों की बकाया राशि दिलाने के लिए संबंधित विभागों को उचित निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

डॉ. अर्चना कडू के अनुसार, नागपुर जिले की किसान उत्पादक कंपनियों की शिकायत के मुताबिक करीब 73 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इस मामले में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी से पत्राचार किया गया है।

इन किसान कंपनियों की रकम अटकी

कान्होलीबारा किसान उत्पादक कंपनी, हिंगणा – 44 लाख 33 हजार 740 रुपये

कन्हान एग्रो विजन, पारशिवनी – 6 लाख 96 हजार 408 रुपये

अर्बन रूरल एग्रो फ्लाय, कुही – 5 लाख 24 हजार 425 रुपये

श्रीकृष्ण एग्रो, कलमेश्वर – 3 लाख 4 हजार रुपये

शंकर ढगे, रामटेक – 15 लाख 22 हजार 315 रुपये

कृषि स्वराज किसान उत्पादक कंपनी, राजुरा, चंद्रपुर – 5 लाख 60 हजार 319 रुपये

किसान कंपनियों के लिए तैयार माल की बिक्री के बाद समय पर भुगतान मिलना उनकी आर्थिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। लेकिन भुगतान के लिए दिए गए चेक ही बाउंस होने से अब इन कंपनियों के सामने अपनी अटकी रकम वापस पाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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