नागपुर यूनिवर्सिटी का बड़ा फैसला! अब नहीं लगाना पड़ेगा पुनर्मूल्यांकन का चक्कर, मिलेगी उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी

नई व्यवस्था से छात्रों को अपने पेपर की जांच समझने का मिलेगा मौका, शिकायत होने पर निवारण समिति में रख सकेंगे अपनी बात

नागपुर : राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों और पुनर्मूल्यांकन को लेकर छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है। विश्वविद्यालय अब पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को बंद करने की तैयारी में है। इसके बजाय विद्यार्थियों को उनकी उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने की योजना है। यह जानकारी सोमवार को हुई सीनेट की बैठक में कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने दी।

दरअसल, 9 सितंबर को स्थगित हुई सीनेट की बैठक 21 सितंबर को नागपुर विश्वविद्यालय के जमनालाल बजाज प्रशासनिक भवन में हुई। बैठक में सीनेट सदस्य डॉ. अजय चव्हाण ने पुनर्परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित नहीं होने का मुद्दा उठाया। अन्य सदस्यों ने भी इस विषय का समर्थन किया।

गर्मियों की 2027 की परीक्षाओं तक बदलाव की तैयारी

कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने बताया कि विश्वविद्यालय गर्मियों की 2027 की परीक्षाओं तक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया बंद करने की तैयारी कर रहा है। इसके स्थान पर विद्यार्थियों को उनकी जांची हुई उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। एलएलबी सहित कुछ अन्य शाखाओं में इस व्यवस्था का प्रयोग इसी साल किए जाने की जानकारी दी गई।

पेपर की जांच पर संदेह हो तो शिकायत का रास्ता

स्कैन कॉपी देखने के बाद यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसकी उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं हुआ है, तो वह विश्वविद्यालय की शिकायत निवारण समिति के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा। समिति शिकायत की जांच करने के बाद उस पर निर्णय लेगी। विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य पुनर्मूल्यांकन के कारण होने वाली देरी को कम करना है। छात्रों के लिए भी यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें अपने उत्तरों और मूल्यांकन को सीधे देखने का अवसर मिलेगा।

ज्यादा अंक मिले तो फीस वापसी की मांग

बैठक में पुनर्मूल्यांकन शुल्क को लेकर भी चर्चा हुई। सीनेट सदस्यों की मांग है कि यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद विद्यार्थी के अंक बढ़ते हैं, तो उसे जमा किया गया शुल्क वापस किया जाना चाहिए। सदस्य विष्णू चांगदे ने सुझाव दिया कि पुनर्मूल्यांकन के आवेदन में ही बैंक खाते की जानकारी देने की सुविधा होनी चाहिए। इससे अंक बढ़ने की स्थिति में शुल्क वापस करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। फिलहाल यह व्यवस्था विश्वविद्यालय की तैयारी के स्तर पर है। आने वाले समय में इसे किस तरह लागू किया जाता है, इस पर छात्रों की नजर रहेगी।

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