‘जिद थोड़ी कम कीजिए…’ सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दिखाई कानून की राह

नवोदय विद्यालय और हिंदी के मुद्दे पर सुनवाई; जस्टिस नागरत्ना ने कहा- दिल्ली से आने वाली बातों से चेन्नई का महत्व कम नहीं होगा

नई दिल्ली : तमिलनाडु में नवोदय विद्यालय शुरू करने के मुद्दे पर राज्य सरकार और केंद्र के बीच मतभेद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य को अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में अच्छा काम करने के साथ-साथ दूसरे स्तर पर सहयोग करने से तमिलनाडु का दर्जा कम नहीं होगा।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि दिल्ली से आने वाली किसी व्यवस्था या पहल से चेन्नई का महत्व कम नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चेन्नई को दिल्ली से दूर नहीं रहना चाहिए और दिल्ली को भी चेन्नई से दूर नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में टकराव के बजाय बातचीत और सहयोग जरूरी है।

नवोदय विद्यालय को लेकर क्या है विवाद?

मामला प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने से जुड़ा है। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय खोलने के निर्देश दिए गए थे।सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को स्कूलों के लिए जमीन की पहचान करने में सहयोग करना होगा। कोर्ट ने कहा कि राज्य से जमीन अपने कब्जे में लेने की बात नहीं कही जा रही है, बल्कि स्कूल के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने को कहा जा रहा है।

हिंदी को लेकर भी राज्य की आपत्ति

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने दलील दी कि नवोदय विद्यालयों की व्यवस्था राज्य की भाषा नीति के अनुरूप नहीं है। तमिलनाडु लंबे समय से दो-भाषा नीति का पालन करता आया है, जबकि नवोदय विद्यालयों में तीन-भाषा व्यवस्था का प्रावधान है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। राज्य सरकार का कहना है कि इससे तमिल भाषा को पर्याप्त महत्व न मिलने की चिंता है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि राज्य की अपनी शिक्षा नीति और भाषा नीति हो सकती है और उसके क्रियान्वयन को लेकर केंद्र के साथ बातचीत की जा सकती है।

‘जिद थोड़ी कम करनी होगी’

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने राज्य सरकार से कहा कि उसे अपना रुख थोड़ा लचीला करना चाहिए। अदालत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग से राज्य का शैक्षणिक स्तर कम नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी नीति को केवल इसलिए स्वीकार करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह राज्य की मौजूदा नीति से अलग है। आज मामला शिक्षा का है, भविष्य में कोई दूसरा विषय हो सकता है। ऐसे मामलों में संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना जरूरी है।

नवोदय विद्यालय क्या हैं?

नवोदय विद्यालय केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित सह-शैक्षणिक और आवासीय विद्यालय हैं। इनका संचालन केंद्र से मिलने वाली निधि से होता है। तमिलनाडु में इन विद्यालयों की शुरुआत को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति मुख्य रूप से भाषा नीति और तीन-भाषा व्यवस्था से जुड़ी है।

 

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