₹100 के UPI पेमेंट पर 40 पैसे का शुल्क, ‘जान तो नहीं जाएगी’; NITI आयोग के उपाध्यक्ष का बयान

2 हजार रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR की चर्चा, फैसले को लेकर देशभर में बहस तेज

नई दिल्ली : UPI पेमेंट को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से व्यापारियों के लिए 2 हजार रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की बात सामने आई है। इस फैसले को लेकर जहां अतिरिक्त आर्थिक बोझ की चिंता जताई जा रही है, वहीं NITI आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने इसका समर्थन किया है।

‘हर लेनदेन पर सरकार सब्सिडी नहीं दे सकती’

अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि सरकार हर लेनदेन पर हमेशा सब्सिडी नहीं दे सकती। डिजिटल पेमेंट से जुड़ी व्यवस्था को लंबे समय तक अपने पैरों पर खड़ा रखने के लिए कुछ शुल्क की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को छोटी-छोटी लागत वहन करने की आदत डालनी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 100 रुपये के लेनदेन पर 40 पैसे का शुल्क देना होगा। उनके मुताबिक, यह शुल्क केवल बड़े लेनदेन पर लागू होगा और इससे किसी की जान नहीं जाएगी।

2 हजार तक के UPI पेमेंट पर शुल्क नहीं

बताए गए नए नियम के अनुसार, 2 हजार रुपये तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 2 हजार रुपये से अधिक के व्यापारिक UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने की बात कही गई है। यह शुल्क ग्राहक के बजाय व्यापारी को देना होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर सभी की राय एक जैसी नहीं है। आम लोगों और छोटे दुकानदारों पर इसका आर्थिक असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। ऐसे में UPI शुल्क का मुद्दा आने वाले दिनों में और चर्चा में रहने की संभावना है।

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