मुंबई : पनवेल तालुका के मौजे कोन में घर मिलने वाले गिरणी कामगारों और उनके वारिसों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। सरकार ने इन घरों पर लगने वाला 11 करोड़ 95 लाख 62 हजार 360 रुपये का सेवा शुल्क माफ करने को मंजूरी दे दी है। यह शुल्क 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि का है।
इस फैसले से उन गिरणी कामगारों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे थे। घर मिलने के बाद भी सेवा शुल्क का आर्थिक बोझ उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था।
2,417 घरों का हुआ था आवंटन
मौजे कोन में रेंटल हाउसिंग योजना के तहत एमएमआरडीए से प्राप्त 2,417 सदनिकाएं गिरणी कामगारों और उनके वारिसों को देने के लिए म्हाडा की ओर से कंप्यूटराइज्ड लॉटरी निकाली गई थी। हालांकि, अलग-अलग कारणों से इन घरों का प्रत्यक्ष कब्जा देने में देरी हुई। इसी देरी को देखते हुए सरकार ने पहले 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक एक साल का सेवा शुल्क माफ किया था। अब सरकार ने आगे की अवधि के लिए भी सेवा शुल्क माफ करने का फैसला लिया है।
किस अवधि का कितना शुल्क माफ?
– 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025: 3 करोड़ 2 लाख 78 हजार 88 रुपये
– 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026: 4 करोड़ 25 लाख 12 हजार 376 रुपये
– 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027: 4 करोड़ 67 लाख 71 हजार 896 रुपये
कुल माफ किया गया सेवा शुल्क: 11 करोड़ 95 लाख 62 हजार 360 रुपये।
कामगारों को राहत, म्हाडा पर आर्थिक भार
सरकार के इस निर्णय से गिरणी कामगारों और उनके वारिसों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। वहीं, करीब 11.95 करोड़ रुपये का सेवा शुल्क माफ होने से म्हाडा पर आर्थिक भार पड़ेगा।


