मुंबई : मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम 2’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ। एपी ग्लोबल की ओर से आयोजित इस फोरम में दुनिया में बढ़ती दूरी, अलग-अलग संस्कृतियों और देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान फडणवीस ने कहा कि आज दुनिया को सिर्फ आर्थिक सहयोग की नहीं, बल्कि लोगों और संस्कृतियों के बीच मजबूत संवाद की भी जरूरत है।
श्रीकृष्ण के संदेश से शुरू हुई बात
कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जयंती का संदर्भ देते हुए फडणवीस ने समावेशिता, नैतिकता और सत्य की जीत का संदेश सामने रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अलग-अलग देश, समाज और विचारधाराएं हैं, लेकिन कई स्तरों पर सभी के बीच समानताएं भी मौजूद हैं। इन्हीं समानताओं और साझा मूल्यों के आधार पर देशों को एक-दूसरे के करीब लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों के साथ संस्कृति और आम लोगों के बीच बातचीत भी जरूरी है। ऐसे संवाद से आपसी समझ बढ़ेगी और दुनिया में सहयोग का माहौल मजबूत होगा।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ भारत की सोच
फडणवीस ने भारत की प्राचीन संस्कृति का उल्लेख करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने सदियों से केवल व्यापार ही नहीं किया, बल्कि अपने विचार और संस्कृति भी दुनिया तक पहुंचाई है। उन्होंने बौद्ध धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत से निकले विचारों ने बिना युद्ध के दुनिया के कई हिस्सों पर प्रभाव डाला। उनका कहना था कि अलग-अलग देशों की प्राचीन परंपराओं, खान-पान और चिकित्सा पद्धतियों में भी दुनिया के लिए उपयोगी ज्ञान मौजूद है।
BRICS को लेकर क्या बोले फडणवीस?
BRICS का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी शक्ति के विरोध में बनाया गया समूह नहीं है। उनके मुताबिक, अलग-अलग और समृद्ध संस्कृतियों वाले देशों के पास दुनिया को देने के लिए काफी अनुभव और मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि आज जब वैश्विक सप्लाई चेन कई स्तरों पर बंट रही हैं, ऐसे समय में देशों के बीच सहयोग और संवाद पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। केवल राजनीतिक स्तर पर सहमति काफी नहीं है, बल्कि लोगों और संस्कृतियों के बीच भी रिश्ते मजबूत होने चाहिए।
मुंबई क्यों है खास?
ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम के लिए मुंबई को उपयुक्त स्थान बताते हुए फडणवीस ने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक और कारोबारी राजधानी है। इसके साथ ही यह टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और फिनटेक का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। मुंबई की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए लोग यहां साथ रहते और काम करते हैं। यही विविधता इसे वैश्विक संवाद के लिए एक खास जगह बनाती है। फडणवीस ने उम्मीद जताई कि ऐसे मंचों के जरिए अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच सहयोग की नई व्यवस्था तैयार हो सकती है और दुनिया को साथ लेकर चलने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।


