नागपुर : संकष्टी चतुर्थी के पावन अवसर पर 31 अगस्त 2026 को नागपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले मस्कऱ्या (हाडपक्या) गणपति बप्पा का पाद्यपूजन समारोह भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। महाराजा ऑफ नागपुर ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूजा-अर्चना के दौरान भक्तों ने गणराया के चरणों में नतमस्तक होकर सुख-समृद्धि की कामना की।
मस्कऱ्या गणपति उत्सव की परंपरा करीब 239 वर्षों से नागपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनी हुई है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1787 में सरकार समशेर बहादूर श्रीमंत राजे खंडोजी महाराज भोसले उर्फ चिमणाबापू ने इस उत्सव की शुरुआत की थी। बंगाल की स्वारी में विजय प्राप्त करने के बाद इस विजय की खुशी में मस्कऱ्या गणपति की स्थापना की गई थी। उस समय नकला, लावणी और खड़ी गंमत जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह उत्सव सार्वजनिक रूप से मनाया जाता था। इस ऐतिहासिक परंपरा का महत्व इतना व्यापक रहा कि आगे चलकर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पितृपक्ष में गणपति की स्थापना करने की अनोखी परंपरा मस्कऱ्या गणपति उत्सव की विशेष पहचान है और यह परंपरा आज भी कायम है। वर्ष 2002 में इस उत्सव ने 215 वर्ष पूरे किए थे। इसके बाद महाराजा ऑफ नागपुर ट्रस्ट के प्रबंधन और नागपुर महाराज श्रीमंत राजे मुधोजी भोसले के मार्गदर्शन में उत्सव को और व्यापक रूप दिया गया। वर्ष 2026 में इस परंपरा ने 239 वर्षों का ऐतिहासिक पड़ाव पूरा किया है।
‘नवसाला पावणारा गणपति’ के रूप में मस्कऱ्या गणपति के प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। महाराष्ट्र के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पाद्यपूजन के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना कर इस ऐतिहासिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक इसी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। महाराजा ऑफ नागपुर ट्रस्ट के सह सोशल मीडिया प्रमुख नितीन (मोंटू) गुरव और तुषार चव्हाण के हस्ते पाद्यपूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर ट्रस्ट के कार्याध्यक्ष राजे जयसिंह भोसले, पदाधिकारी, विश्वस्त, कार्यकर्ता, मानकरी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा और समारोह का समापन हुआ।


