नेपाल : नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाने वाली बाढ़ के पीछे की असली तस्वीर अब सामने आ रही है। तिब्बत में उस ग्लेशियर तक चीन का विशेष खोज दल और हेलिकॉप्टर पहुंच गया है, जहां से अचानक पानी का प्रलय नीचे की ओर बहा था। हवाई निरीक्षण में ग्लेशियर के बीच एक विशाल गड्ढा दिखाई दिया है, जबकि उसके नीचे से अब भी तेज पानी बहता नजर आ रहा है।
वैज्ञानिक भाषा में इस घटना को GLOF (Glacial Lake Outburst Flood) यानी ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ कहा जाता है। माना जा रहा है कि ग्लेशियर से बनी प्राकृतिक झील पर पानी का दबाव बढ़ने के बाद उसका बांधनुमा हिस्सा टूट गया और देखते ही देखते लाखों लीटर पानी, मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर तेज रफ्तार से पहाड़ों की ढलानों से नीचे आ गए।
ग्लेशियर के बीच बना विशाल गड्ढा
चीन के खोज दल द्वारा किए गए हवाई निरीक्षण में ग्लेशियर के बीच गहरे कुएं जैसा विशाल गड्ढा दिखाई दिया। चारों ओर बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों के बीच यह नजारा बेहद डरावना है। ग्लेशियर के नीचे से निकल रहा तेज पानी अब एक नदी की तरह बहता हुआ दिखाई दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की तेजी से बदलती स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ड्रोन और सैटेलाइट से रखी जा रही नजर
ग्लेशियर और मौसम की स्थिति पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक सेंसर, ड्रोन, रियल-टाइम कैमरे और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हीं तकनीकों की मदद से आपदा के संभावित स्रोत का पता लगाने में मदद मिली। फिलहाल सामने आई तस्वीरें यह बताती हैं कि यह घटना अचानक आई प्राकृतिक आपदा भर नहीं थी, बल्कि ग्लेशियर झील के फटने से पैदा हुआ पानी का विशाल प्रवाह इसके पीछे था। हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तापमान और पर्यावरण में हो रहे बदलावों के बीच भविष्य में ऐसी घटनाओं का खतरा गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।


