काठमांडू : नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। इस बीच नेपाल सरकार ने भारत, अमेरिका, चीन और ब्रिटेन समेत कई देशों की ओर से भेजे जाने वाले विशेष बचाव दलों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि नेपाल की सेना और पुलिस अपने स्तर पर बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं।
नेपाल सरकार ने यह फैसला सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद लिया है। हालांकि, विदेशी देशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता और राहत सामग्री को स्वीकार किया जा रहा है।
2015 के भूकंप का अनुभव बना वजह
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंची थीं। उस समय भाषा की समस्या, स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी का अभाव और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण बचाव अभियान में कई मुश्किलें सामने आई थीं। इसी पुराने अनुभव को देखते हुए नेपाल ने इस बार विदेशी बचाव दलों की जगह आर्थिक सहायता और जरूरी राहत सामग्री स्वीकार करने का फैसला किया है।
भारत ने भी नेपाल की मदद के लिए एनडीआरएफ की टीम भेजने की तैयारी जताई थी। हालांकि, नेपाल ने जमीन पर विदेशी रेस्क्यू टीम तैनात करने के बजाय भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए भेजी गई राहत सामग्री स्वीकार की है।
1,024 विदेशी नागरिकों को बचाया
भयंकर बाढ़ और भूस्खलन के बीच नेपाल की सेना ने दुर्गम और संपर्क से कटे इलाकों में बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। अब तक 1,024 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर चिंता बढ़ा रही है। करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।
जानकारी के मुताबिक, 32 देशों के 700 से अधिक विदेशी नागरिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 517 लोग नेपाल में और लगभग 260 लोग चीन की सीमा में लापता होने की जानकारी सामने आई है।
ऑस्ट्रेलिया ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में जारी संकट के बीच ऑस्ट्रेलिया ने आर्थिक मदद की घोषणा की है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने नेपाल को 50 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर यानी करीब 35 करोड़ रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। बाढ़ में कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण दूरदराज के इलाकों से संपर्क टूट गया है। ऐसे में इस आर्थिक सहायता का इस्तेमाल प्रभावित लोगों तक जरूरी मानवीय मदद पहुंचाने में किया जाएगा। वहीं, नेपाल में लापता 39 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की तलाश में ऑस्ट्रेलिया ने अतिरिक्त अधिकारियों की एक टीम काठमांडू भेजी है।
अपनों की तलाश में टिकी उम्मीदें
नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने हजारों परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है। कहीं सड़कें बह गई हैं तो कहीं पुल टूटने से गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। एक ओर नेपाल अपनी सेना और पुलिस के भरोसे राहत अभियान चला रहा है, तो दूसरी ओर लापता लोगों के परिवार अब भी अपने अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में आने वाले दिन राहत और बचाव अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


